म्यांमार में हिंदुओं के नरसंहार में शामिल रहे रोहिंग्या आतंकियों को गिरफ्तार करके उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। यह बात संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों के विशषज्ञ टाम एंड्रूज ने प्रेस कान्फ्रेंस में कही है। टाम ने अराकान रोहिग्या साल्वेशन आर्मी (एआरएसए) के कृत्यों पर आधारित दस्तावेज तैयार किया है। टाम अमेरिका के पूर्व सांसद हैं।
म्यांमार में हिंदुओं पर हमलों के संबंध में यह दस्तावेज एमनेस्टी इंटरनेशनल के लिए तैयार किया गया है। इसमें म्यांमार में मानवाधिकारों की स्थिति की भी विस्तार से चर्चा है। टाम ने कहा है कि म्यांमार में हिंदुओं की सुनियोजित प्रताड़ना और उनकी हत्या हुई हैं। मामले में दोषियों को गिरफ्तार करके उन पर विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। एआरएसए रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय का आतंकी संगठन है। यह संगठन म्यांमार में कई जघन्य वारदातों के लिए जिम्मेदार है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहिंग्या आतंकियों ने 99 से ज्यादा हिंदू महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की हत्या की। गांवों में रहने वाले हिंदुओं को बड़ी संख्या में अगवा करके ले जाया गया और उन पर अत्याचार किए गए। यह सब म्यांमार के रोहिंग्या बहुल प्रांत राखिन में 2017 में हुआ। टाम ने म्यांमार में जाकर यह रिपोर्ट तैयार की है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की क्राइसिस रिस्पांस डायरेक्टर तिराना हसन ने कहा है- राखिन प्रांत में अपराधों के भयावह इतिहास के सुबूत हैं। एआरएसए का सरगना कराची (पाकिस्तान) में जन्मा अताउल्ला अबू आमेर जुनूनी है। यह वही संगठन है जिसके सुरक्षा बलों पर लगातार हमलों के बाद म्यांमार की सेना ने कार्रवाई की थी। उसके बाद लाखों रोहिंग्या मुसलमानों ने भागकर बांग्लादेश में शरण में ली। कई हजार रोंहिंग्या भागकर भारत भी आ गए हैं और यहां पर रह रहे हैं।










