धमतरी वन विभाग की अनदेखी से कास्टागार में रखे बेशकीमती इमारती लकड़ी के सड़ने का मामला सामने आया है। दरअसल, धमतरी वन परिक्षेत्र अंतर्गत शहर स्थित वन कास्टागार में नीलामी के बाद बचे इमारती लकड़ी खुले आसमान में रखा गया है। कास्टागार में बरसात का पानी भर जाने की वजह से लकड़ी सड़ने लगी है, जिससे सरकार को लाखों रूपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। वही, वन विभाग को इस ओर झांकने की फुरसत तक नहीं है। इसके चलते वन कास्टागार मैखाने में तब्दील हो गया है।
धमतरी वन मंडल वन काष्ठागार राजस्व के मामले में प्रदेश में नंबर वन है, जहा सागौन, साल सहित अन्य प्रजाति बेशकीमती इमारती लकड़ी की नीलामी होती है। इससे सरकार को हर साल नीलामी से करोड़ों का मुनाफा होता है। धमतरी शहर स्थित सिहावा रोड़ के पास जिला वन विभाग का जिला कार्यालय है। बड़े अधिकारी से लेकर छोटे वर्ग के अधिकारी की मौजूदगी होती है, लेकिन कार्यालय के पीछे काष्ठागार में रखे बेस कीमती लकड़ियों को सड़ने दिया जा रहा है। इससे अब सरकार को करोड़ो का चूना लग रहा है। विभाग अब तक पानी निकासी के लिए समुचित व्यवस्था नहीं की है। इससे हर साल लाखों रूपए की बेशकीमती इमारती लकड़ी पानी में डूब कर सड़ जाती है। वन विभाग की लापरवाही से सरकार को बड़ा राजस्व का नुकसान हो रहा है।
इस मामले में धमतरी से कांग्रेस विधायक ने वन विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि निकासी के लिए और गेट के लिए पैसा आया था। अधिकारियों ने मिलकर हड़प कर किए इसमें जमकर भ्रष्टाचार किया है। कांग्रेस इसकी लड़ाई सदन तक लड़ेगी। वहीं, भाजपा के प्रदेश महामंत्री रामू रोहरा ने कहा कि कीमती लकड़ियों को बर्बाद होने नहीं दिया जाएगा। सरकार को करोड़ो का नुकसान बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके लिए विभाग के जिमेदार अधिकारी से बात कर कर समस्या का हल निकाला जाएगा।










