शिव के भक्तों के लिए सावन का सावन का महीना विशेष फल दायक होता है। शिव पुराण में भगवान शंकर की पूजा में फूल-पत्तियां दोनों को ही चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें से ही एक है शमी की पत्ती और फूल। आईए जाने शिव जी को प्रिय शमी की पत्तियों और पेड़ का क्या है धार्मिक महत्व।
शमी के फूल को शिवलिंग पर अर्पित करने से जहां घर में अपार धन-संपदा का आशीर्वाद मिलता है। शमी की पत्तियां शिव जी को अति प्रिय हैं। इस लिए शिव जी की पूजा में शम पत्र का विशेष महत्व होता है। एक शमी पत्र चढ़ाने के एक हजार गुना अधिक पुण्य मिलता है। भगवान शिव जी के अलावा अन्य देवी देवताओं को भी शमी पत्र और फूल बेहद पसंद है। वहीं शमी का वृक्ष लगाने से शनि से जुड़े सभी दोषों से मुक्ति मिल जाती है।
शमी वृक्ष पुष्प के साथ….
घर में शमी का पेड़ लगाने से देवी-देवताओं की कृपा होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही यह वृक्ष शनि के कोप से भी बचाता है। मान्यताओं में शमी का वृक्ष बड़ा ही मंगलकारी माना गया है। लंका पर विजयी पाने के बाद श्रीराम ने शमी पूजन किया था। नवरात्र में भी मां दुर्गा का पूजन शमी वृक्ष के पत्तों से करने का विधान है। गणेश जी और शनिदेव, दोनों को ही शमी बहुत प्रिय है। महाभारत के संदर्भ से पता चलता है कि पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्ष में अपने हथियार शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। संभवत: इन्हीं दो कारणों से शमी पूजन की परंपरा प्रारंभ हुई होगी। शमी वृक्ष तेजस्विता एवं दृढता का प्रतीक भी माना गया है, जिसमें अग्नि तत्व की प्रचुरता होती है। इसी कारण यज्ञ में अग्नि प्रकट करने हेतु शमी की लकड़ी के उपकरण बनाए जाते हैं। आयुर्वेदिक दृष्टि में तो यह अत्यंत गुणकारी औषधि मानी जाती है।
शमी का वृक्ष घर के ईशान कोण में लगाना लाभकारी माना गया है । इसमें प्राकृतिक तौर पर अग्निल तत्व पाया जाता है।
दूर होते हैं दोष
शमी के वृक्ष पर कई देवताओं का वास होता है , सभी यज्ञों में शमी वृक्ष की समिधाओं का प्रयोग शुभ माना गया है। शमी के कांटों का प्रयोग तंत्र-मंत्र बाधा और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए होता है। शमी के पंचांग, यानी फूल, पत्ते, जड़ें, टहनियां और रस का इस्तेमाल कर शनि संबंधी दोषों से जल्द मुक्ति पाई जा सकती है।
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