मां एक बहुत बड़ा शब्द है जिसकी कोई परिभाषा नहीं। वो निश्चल स्नेह का सागर है जिसमे हर संतान के लिए बहुत स्नेह छुपा होता है। मां कभी स्वार्थी नही हो सकती वो पहले अपने बच्चो का सोचती है और फिर बाद में अपना। इस लिए ही मां की किसी से भी तुलना नही की जा सकती।
सीखने की कुंजी है मां। बचपन से बड़े होते तक हम हर पल उनसे कुछ न कुछ सीखते हैं। बदले में हम अगर उन्हें दे सकते हैं तो बस मान सम्मान जिसकी उन्हें हमेशा लालसा रहती है l।










