रायपुर, 29 मई 2026।खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न चुनौतियों के बीच अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक प्रभावी और लोकप्रिय विकल्प बनकर उभर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करने पर लागत में कमी, उत्पादन में वृद्धि और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
नैनो उर्वरकों की ओर बढ़ रहा रुझान
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए उर्वरकों के उपयोग के तौर-तरीकों में बदलाव आवश्यक है। यही कारण है कि किसानों के बीच नैनो उर्वरकों के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है।
लागत में कमी का बड़ा विकल्प
छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है। वर्तमान कीमतों के अनुसार यूरिया और डीएपी पर प्रति एकड़ लगभग 1900 से 2200 रुपये तक खर्च होता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर होता है। यदि किसान 2 बोरी यूरिया के स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करते हैं, तो प्रति एकड़ लगभग 100 रुपये तक की बचत संभव है। इसके अलावा परिवहन, भंडारण और मजदूरी लागत में भी कमी आती है।
इसी तरह, 50 किलो डीएपी के बजाय 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी के उपयोग से प्रति एकड़ 75 से 150 रुपये तक की बचत हो सकती है।
उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पारंपरिक यूरिया का बड़ा हिस्सा मिट्टी और वातावरण में नष्ट हो जाता है, जबकि नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा अवशोषित किए जाते हैं। इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है और उत्पादन में सुधार होता है।
परीक्षणों में यह भी सामने आया है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से:
* फसल की वृद्धि बेहतर होती है
* पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है
* दानों का भराव मजबूत होता है
* उत्पादन में 5 से 8 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है
मिट्टी और पर्यावरण के लिए फायदेमंद
विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा:
* रासायनिक अवशेष कम होते हैं
* भूजल प्रदूषण घटता है
* मिट्टी की जैविक सक्रियता बनी रहती है
* पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम होता है
उर्वरकों की उपलब्धता और सरकारी पहल
कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। रायपुर जिले में वर्तमान में यूरिया की उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारण 10,732 मीट्रिक टन है, जबकि डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारण 3,927 मीट्रिक टन है।
इसके साथ ही कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है, ताकि किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका उपयोग कर सकें।
भविष्य की खेती का आधार
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही भविष्य में खेती को अधिक लाभकारी बनाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो कम लागत, बेहतर उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण तीनों में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।










