सुख और दुख एक दूसरे के पूरक है। इस दुनिया में जो व्यक्ति न तो सुख मिलने से खुश होता हैऔर ना अशुभ के प्राप्त होने परउससे दुखी होता है। वह पूर्ण ज्ञान में स्थिर रहता है। उसने अपने आप में काबू पाने की क्षमता को हासिल कर लिया है।
इस दुनिया में दुख-सुख , हर्ष-विषाद आदि लगा रहता है। क्षण भर के सुख से जो खुश नहीं होता और अशुभ होने पर जो दुखी नहीं होता , वह व्यक्ति सच्चा ज्ञानी होता है। उसे ज्ञात होता है यहां सब क्षण भर के लिए होता है भले ही वह सुख हो चाहे दुख।










