वर्ष में कुल 12 अमावस्या आती है जिसमें सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या तिथि को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है. सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए समर्पित होता है साथ ही अमावस्या तिथि पितरों की पूजा, तर्पण, गंगा स्नान और दान करने के लिए बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है. इस वर्ष पड़ने वाली सोमवाती अमावस्या विशेष फलदायी मानी जा रही है. 30 साल बाद अधिकमास की अमावस्या सोमवार के दिन आई है, इससे पहले ये संयोग जुलाई 1996 में बना था.अधिकमास श्रीहरि विष्णु और सोमवती अमावस्या शिव जी, पितरों को समर्पित है. इस दिन किया गया तप-जप, दान समस्त धार्मिक कार्य व्यक्ति को भवसागर से तार लगा देने में सहायक होता है. यही वजह है कि 30 साल बाद आई ये अधिकमास की सोमवती अमावस्या तिथि अत्यंत लाभदायी है, इसे सोने पर सुहागा जैसा दिन माना जा रहा है. इस दिन कुछ खास उपाय आपके जीवन में अनेकों बदलाव ला सकते है.
कहा जाता है कि इस दिन मां दुर्गा की आराधना करने से राहु और केतु से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में मदद मिलती है. राहु-केतु को छाया ग्रह माना गया है और देवी दुर्गा को शास्त्रों में छाया स्वरूप की अधिष्ठात्री शक्ति बताया गया है. ऐसे में उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन लाने वाली मानी जाती है.
अमावस्या का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत, 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगी और इसका समापन 15 जून को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा.ऐसे में स्नान, दान और पूजा के लिए मुहुर्त 15 जून को सुबह 03 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 04 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.
करें यह उपाय
इस दिन विवाहित महिलाएं परिवार की खुशहाली, समृद्धि और प्रियजनों की दीर्घायु की कामना के साथ पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करती हैं. मान्यता है कि यह साधना पारिवारिक सुख और सौभाग्य को मजबूत करने का प्रतीक होती है.
जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष माना जाता है, उनके जीवन में करियर, व्यापार और वैवाहिक मामलों में रुकावटें देखने को मिल सकती हैं. कई बार मन में भय, अस्थिरता या बार-बार सांप से जुड़े सपनों का अनुभव भी बताया जाता है. ऐसी स्थिति में रुद्राभिषेक को एक प्रमुख उपाय माना गया है और सोमवती अमावस्या इस पूजा के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है.
अमावस्या तिथि पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता. ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना गया है. इसलिए इस दिन भगवान शिव को चावल, चीनी, दूध या अन्य सफेद वस्तुएं अर्पित करना चाहिए. ये मन की शांति, सकारात्मक सोच और जीवन में संतुलन बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है.
सोमवती अमावस्या की पूजा विधि
– सबसे पहले सुबह ब्रह्राा मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करें और व्रत रखने और दान करने का संकल्प लें.
– इसके बाद तांबे के लोटे में जल, गंगाजल की कुछ बूंदे, लाल फूल, अक्षत और रोली को डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें.
– सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद जल में काला तिल डाल पितरों को तर्पण दें.
– सोमवती अमावस्या तिथि पर अपने कुल देवता, भगवान विष्णु, भवगवान शिव की पूजा करें.
– भगवान शिव को दूध, गंगाजल और शहद से अभिषेक करें ,भगवान विष्णु की पूजा करते करते हुए मंत्रों का जाप करें.
– अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करने का विधान होता है. इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं और दूध अर्पित करें.
– अमावस्या तिथि पर पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करें.
डिस्क्लेमर : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है. यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Ekhbari.com उत्तरदायी नहीं है.










