Ekhabri धर्म दर्शन: नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। देवी का स्वरूप – श्वेत वस्त्र पहनी हुई छोटी कन्या के रूप में है। मां ब्रह्मचारिणी दाहिने हाथ में जप की माला लिए हुए और बाय हाथ में कमंडल रखी हुई हैं। ब्रह्मचारिणी माता तप की मुद्रा में है, इसे साधना मुद्रा कहा जाता है जो त्याग वैराग्य शांति का प्रतीक है। मां ब्रह्मचारिणी को ब्रह्म का स्वरूप भी माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की साधना उपासना जप तप पूजा पाठ करने से जीवन में आने वाली सभी समस्या और संकट दूर हो जाती है।
क्यों कहलाई ब्रह्मचारिणी:
मां ने भगवान शंकर से विवाह हेतु प्रतिज्ञा की थी की विवाह नहीं होने के कारण ब्रह्मचारिणी कहलाएगी। माता को ब्राम्ही भी कहते हैं।
ब्राह्मी आयु व याददाश्त बढ़ाकर, रक्तविकारों को दूर कर स्वर को मधुर बनाती है। इसलिए उन्हें सरस्वती भी कहा जाता है।
गाय के दूध का भोग बनाएं माता के लिए:
ब्रह्मचारिणी माता की पूजा धूप दीप नैवेद्य सफेद फूल से करना चाहिए। गाय के दूध से बना हुआ भोग माता को बहुत प्रिय है।
इस मंत्र को पढ़े :
वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम् जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम् !!
इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें। देवी को सफेद और सुगंधित पुष्प बहुत प्रिय है कमल के पुष्प भी माता को अर्पित करे।
जाप इस मंत्र से करे —
या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता !
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः!!
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु !
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा !!
तत्पश्चात देवी मां को गाय के कंडे को जलाकर उसमे गुगल से हवन करे। प्रसाद चढ़ाएं और जल आचमन करे। प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें और हाथ जोड़ प्रदक्षिणा करें। 3 बार अपनी ही स्थान में खड़े होकर परिक्रमा करें। प्रदक्षिणा के बाद कपूर से देवी की आरती करें फिर क्षमा प्रार्थना करें।
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