भारतीय क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने जून 2019 में क्रिकेट से संन्यास लेने के पीछे की असली वजह का खुलासा किया है। टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के साथ एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान युवराज ने कहा कि उस दौर में उन्हें न तो खेल में आनंद मिल रहा था और न ही टीम मैनेजमेंट व माहौल से वह सम्मान, जिसके वे हकदार थे। 44 वर्षीय युवराज ने कहा, “मैं अपने खेल का मजा नहीं ले पा रहा था। जब मैदान पर उतरकर खुशी ही न मिले, तो खुद से सवाल उठने लगते हैं कि आखिर मैं क्रिकेट क्यों खेल रहा हूं। मुझे सपोर्ट और सम्मान की कमी साफ महसूस हो रही थी।”
युवराज सिंह ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 30 जून 2017 को एंटीगुआ में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे मैच के रूप में खेला था। इस मैच में उन्होंने 39 रन बनाए थे। इसके बाद वे टीम इंडिया से लगातार बाहर रहे। युवराज ने बताया कि 2019 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में चयन न होना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उस समय उन्हें टीम में नंबर-4 बल्लेबाज के रूप में देखे जाने की चर्चा थी, लेकिन खुद युवराज को चयन की ज्यादा उम्मीद नहीं थी। चयन न होने के बाद युवराज ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास का ऐलान कर दिया।
आईपीएल में युवराज का आखिरी सीजन 2019 रहा, जहां वे मुंबई इंडियंस की ओर से खेले। हालांकि इस सीजन में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। युवराज ने स्वीकार किया कि जब खिलाड़ी मानसिक रूप से खेल से जुड़ाव खो देता है, तो मैदान पर प्रदर्शन करना और कठिन हो जाता है। युवराज ने कहा कि क्रिकेट छोड़ने के बाद उन्हें मानसिक शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा, “मैं मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुका था। यह सोचकर परेशान रहता था कि आखिर मैं क्या साबित करने के लिए खेल रहा हूं। जिस दिन मैंने क्रिकेट छोड़ा, उसी दिन मुझे लगा कि मैंने खुद को दोबारा पा लिया है।”
युवराज ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि एक समय उनकी प्रतिभा पर भी संदेह किया गया था। उन्होंने कहा, “जब मैं 13–14 साल का था, तब एक सीनियर क्रिकेटर ने मेरे पिता से औपचारिक बातचीत में कह दिया था कि शायद मुझमें ज्यादा प्रतिभा नहीं है। मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन मेरे पिता को यह बात बहुत बुरी लगी थी।” युवराज सिंह 2011 वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जीत के सबसे बड़े नायकों में से एक रहे। उन्होंने 8 पारियों में 90.50 की औसत से 362 रन बनाए, जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक शामिल थे। इसके साथ ही उन्होंने 15 विकेट भी झटके। टूर्नामेंट में चार बार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने वाले युवराज को अंत में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया।
वर्ल्ड कप के बाद युवराज को कैंसर होने का पता चला, जिसके चलते वे एक साल से अधिक समय तक क्रिकेट से दूर रहे। इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर उन्होंने सितंबर 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की।









