इस साल का पहला सूर्यग्रहण खत्म गुरुवार को लगा। हालांकि भारत में इसका असर नहीं दिखा। सूर्यग्रहण की शुरुआत सुबह 7 बजकर 4 मिनट पर हुई, जो 12 बजकर 29 मिनट तक जारी रहा। इसका ज्यादातर असर ऑस्ट्रेलिया और इसके आसपास के इलाकों में दिखा। 9 बजकर 4 मिनट पर पूरी तरह से अंधेरा छा गया था। सूर्यग्रहण को काफी दुर्लभ बताया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के अलावा सूर्यग्रहण का प्रभाव इंडोनेशिया में भी देखा गया।
ऑस्ट्रेलिया के एक्समाउथ में पूर्ण सूर्यग्रहण को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटी। लोगों ने सूर्यग्रहण बाइनाकुलर्स और टेलिस्कोप से देखा। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर सेबाइन बेलस्टेड ने बताया कि पूर्ण ग्रहण से पहले धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगा था। उस समय ग्रहण देखने आए लोग बिल्कुल शांत हो गए। तापमान भी कम होने लगा और हवा का बहाव रुक गया। सूर्यग्रहण देखने के लिए दूसरे देशों से भी लोग आए थे। इनमें कई वैज्ञानिक भी शामिल थे।

एस्ट्रोनॉमिकल फोटोग्राफर कैथरीन ने बताया कि दुनिया के अलग-अलग इलाकों से वैज्ञानिक ग्रहण को देखने के लिए ऑस्ट्रेलिया आए थे। उन्होंने कहा- जब सब लोग सूर्यग्रहण देखने के लिए अपना सामान निकाल रहे थे तो मैनें पक्षियों की हलचल को नोटिस करना शुरू किया। जैसे-जैसे अंधेरा होने लगा पक्षी खुद को छिपाने लगे। वो एकदम से शांत हो गए।

हाइब्रिड सूर्य ग्रहण में दो तरह से ग्रहण दिखता है, पहला जिसमें चंद्रमा पूरी तरह से सूरज को ढक लेता है और अंधेरा छा जाता है, दूसरे में चांद के सामने आने से सूरज की सिर्फ आउट लाइन दिखाई देती है, जिसे सोलर रिंग कहा जाता है। हाइब्रिड ग्रहण में ये ऐसा एक साथ होता है, जो सदी में कभी-कभार ही दिखाई देता है। हाइब्रिड सूर्य ग्रहण अगली बार 2031 में दिखाई देगा।










