रायपुर, 05 जनवरी 2026।संकल्प और परिश्रम के बल पर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने वाले लोग न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बनते हैं। राजनांदगांव जिले के वैशाली नगर निवासी प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही सरकारी योजना और निरंतर मेहनत के माध्यम से स्वरोजगार को सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।

प्रदीप देशपांडे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत अपना लघुवनोपज आधारित प्रसंस्करण उद्योग प्रारंभ किया। इस योजना से उन्हें न केवल आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ने का अवसर भी मिला।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को औपचारिक स्वरूप देना और उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाना है। योजना के तहत पात्र उद्यमियों को 35 प्रतिशत तक ऋण आधारित अनुदान, अधिकतम 10 लाख रुपये तक, ब्रांडिंग, मार्केटिंग, प्रशिक्षण और आधारभूत संरचना से जुड़ी सहायता प्रदान की जाती है।

लघुवनोपज की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदीप देशपांडे ने चिरौंजी, हर्रा और बहेरा पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की। उद्योग के लिए मशीनरी और शेड निर्माण हेतु कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया, जिसमें से 2 लाख 13 हजार 500 रुपये की अनुदान राशि योजना के अंतर्गत प्राप्त हुई।
उद्योग की स्थापना के साथ ही उन्होंने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिला और वे आर्थिक रूप से सशक्त हुईं, जिससे उनके परिवारों की आजीविका में भी सुधार आया।
योजना से प्राप्त सहायता से प्रदीप देशपांडे ने आईटीआई मुंबई निर्मित चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस मशीन से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है। इसके साथ ही छिलकों से चारकोल का निर्माण, गिरी से तेल निष्कर्षण तथा हर्रा-बहेरा की प्रोसेसिंग का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे उत्पादों का मूल्य संवर्धन संभव हो सका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर ऊर्जा से संचालित किया गया है। इससे बिजली लागत शून्य हो गई है और उत्पादन कार्य में निरंतरता बनी हुई है, जिससे कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।
चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक फैल चुका है। इस उद्योग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है।
इस पहल से वनीय क्षेत्रों में लघुवनोपज के सतत संग्रहण, पौध संरक्षण और आजीविका के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने में प्रभावी सिद्ध हो रही है। उन्होंने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।










