रायपुर, 12 फरवरी 2026।छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल से आत्मीय मुलाकात कर प्रदेश के विकास मॉडल, योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की।

मुख्यमंत्री ने अतिथि पत्रकारों का पारंपरिक गमछा भेंट कर स्वागत किया। संवाद के दौरान मुख्यमंत्री की सादगी, सहृदयता और आतिथ्य से पत्रकार अभिभूत नजर आए और उन्होंने मुख्यमंत्री को सिक्किम आने का आमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है और प्रदेश में लगभग 31 प्रतिशत आदिवासी आबादी निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत विभिन्न उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है, वहीं चरण पादुका योजना के तहत श्रमिकों को निःशुल्क चप्पल भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को कम करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही में छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और 15 हजार रुपये की सामग्री सहायता प्रदान की जाती है।
नक्सलवाद पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सल समस्या अब अंतिम चरण में है। राज्य की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता और तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा संचालित ‘बस्तर पंडुम’ कैफे इसका सशक्त उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 17 शासकीय योजनाओं को प्रभावी रूप से पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र अब तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण राज्य है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।
स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। नई औद्योगिक नीति के तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से फिल्म उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
सिक्किम की पत्रकार अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ भ्रमण के दौरान उन्हें ‘मेक इन इंडिया’ की मजबूत झलक देखने को मिली। भिलाई स्टील प्लांट सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों ने प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने उन्हें भारतीय होने पर गर्व महसूस कराया।
भ्रमण उपरांत पत्रकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। पांच दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर और जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान-हितैषी नीतियों और पुनर्वास मॉडल की सराहना की।
इस अवसर पर सिक्किम के पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी सौहार्द का प्रतीक बताते हुए आभार व्यक्त किया।










