रायपुर, 04 जून 2026।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संतुलन का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध यह राज्य हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर विकास की नई दिशा तय कर रहा है।

प्रकृति केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और भविष्य की संरक्षक भी है। वर्तमान समय में बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव ने पर्यावरण संरक्षण को अनिवार्य बना दिया है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है। राज्य में वृक्षारोपण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए ‘हरियाली प्रसार योजना’ और ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’ के जरिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे न केवल हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, बल्कि किसानों को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक जुड़ाव के साथ समाज में व्यापक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है। इस पहल के माध्यम से नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों में ‘ऑक्सीवन योजना’ और ‘पर्यावरण वानिकी योजना’ के तहत ऑक्सीजन पार्क, हरित क्षेत्र और सड़क किनारे वृक्षारोपण किए जा रहे हैं, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ जीवन गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘मोर गांव मोर पानी’ और ‘मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में नई चेतना पैदा की है। पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और भूजल संवर्धन के प्रयास जल संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
नदी तट वृक्षारोपण और आर्द्रभूमि संरक्षण परियोजनाओं के माध्यम से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। महानदी जलग्रहण क्षेत्र में वेटलैंड संरक्षण कार्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने के लिए ‘नेशनल ग्रीन कॉर्प्स’ और ‘ईको क्लब’ कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता और जैव विविधता संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां उन्हें पर्यावरण प्रहरी बना रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। जल की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल जैसे छोटे कदम बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
छत्तीसगढ़ आज हरित विकास के उस मॉडल को साकार कर रहा है, जिसमें विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक बनकर आगे बढ़ रहे हैं। यदि यही प्रयास जारी रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।










