रायपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और जैव विविधता के कारण पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। लंबे समय तक नक्सलवाद और हिंसा की घटनाओं के कारण बस्तर की पहचान उसकी वास्तविक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप देश-दुनिया के सामने नहीं बन सकी। अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और बस्तर शांति, विकास और पर्यटन की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर की इस बदलती तस्वीर को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में लेह-लद्दाख के अध्ययन एवं एक्सपोजर विजिट से लौटे पत्रकारों से सौजन्य मुलाकात के दौरान यह बात कही। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से उनके अध्ययन भ्रमण के अनुभवों पर चर्चा की और बस्तर में पर्यटन के विकास तथा उसकी सकारात्मक पहचान बनाने में मीडिया की भूमिका पर विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर प्रकृति की अनुपम देन है। यहां के घने जंगल, जलप्रपात, नदियां, पहाड़ और गुफाएं पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। इसके साथ ही बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराएं, लोककला, हस्तशिल्प, खान-पान और जीवनशैली भी इसे देश के अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान देती हैं। बस्तर का हर क्षेत्र प्रकृति और संस्कृति की अलग कहानी अपने भीतर समेटे हुए है। जरूरत है कि इन विशेषताओं को प्रभावी तरीके से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रस्तुत किया जाए।
विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछले चार दशकों में राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की चर्चा मुख्य रूप से नक्सलवाद और हिंसा से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में होती रही। इसके कारण बस्तर की वास्तविक पहचान और उसकी प्राकृतिक-सांस्कृतिक संपदा पीछे छूट गई। अब नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता और क्षेत्र में बन रहे शांतिपूर्ण वातावरण ने बस्तर के विकास के नए रास्ते खोले हैं।
उन्होंने कहा कि सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ बस्तर में पर्यटन की संभावनाएं भी तेजी से आकार ले रही हैं। राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से जब बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और पर्यटन स्थलों से जुड़ी सकारात्मक कहानियां सामने आएंगी, तो देशभर में बस्तर को लेकर लोगों की धारणा भी बदलेगी। बस्तर की पहचान अब नक्सलवाद के बजाय प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और विकास के लिए बने, यह सामूहिक प्रयास होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन केवल किसी क्षेत्र की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा आधार भी बन सकता है। बस्तर में पर्यटन के विस्तार से होटल, होम-स्टे, परिवहन, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, गाइड सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं और महिलाओं को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और स्थानीय उत्पादों को भी पर्यटन के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाने के साथ उनकी कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को भी नई पहचान मिलेगी।
लेह-लद्दाख का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक और भौगोलिक विशिष्टताओं वाले क्षेत्रों में सुव्यवस्थित पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। अध्ययन भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने लेह-लद्दाख में पर्यटन प्रबंधन, स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन आधारित आजीविका के विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा है। इन अनुभवों से बस्तर में पर्यटन विकास के लिए भी नई संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में शांति और विकास को स्थायी स्वरूप देने के साथ पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि देश और दुनिया से पर्यटक निर्भय होकर बस्तर आएं, यहां की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति को करीब से देखें और बदलते हुए बस्तर का अनुभव लेकर लौटें।
इस अवसर पर पत्रकारों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ लेह-लद्दाख अध्ययन भ्रमण के अनुभव साझा किए। उन्होंने वहां के पर्यटन विकास, स्थानीय अर्थव्यवस्था, संस्कृति और पर्यटन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित पत्रकारगण उपस्थित रहे।










