रायपुर, 1 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 इन दिनों उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक विविधता के रंगों से सराबोर है। राज्योत्सव परिसर में छत्तीसगढ़ की लोककला, परंपराओं, हस्तशिल्प और विकास की उपलब्धियों के साथ देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति और खान-पान की झलक भी देखने को मिल रही है। इसी सांस्कृतिक संगम के बीच राजस्थान के कोटा से पहुंचे नीरज शर्मा का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
राजस्थान के पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू राज्योत्सव में आने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। नीरज शर्मा अपने स्टॉल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लोगों को राजस्थान के पारंपरिक खान-पान और समृद्ध पाक संस्कृति से रूबरू करा रहे हैं।

नीरज शर्मा के स्टॉल पर राजस्थान की प्रसिद्ध दाल-बाटी-चूरमा और जोधपुर की मशहूर प्याज कचौरी का स्वाद लोगों को खूब पसंद आ रहा है। घी से सजी सुनहरी बाटी, पारंपरिक मसालों से तैयार दाल और मिठास से भरपूर चूरमा राजस्थानी खान-पान की खास पहचान हैं। वहीं कुरकुरी परत और मसालेदार प्याज की भरावन वाली कचौरी अपने चटपटे स्वाद से लोगों का दिल जीत रही है।
राज्योत्सव में पहुंचने वाले परिवार, युवा और बुजुर्ग इन पारंपरिक व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं। कई लोग पहली बार राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद चख रहे हैं, तो वहीं राजस्थान के खान-पान से परिचित लोग अपने पसंदीदा जायके को पाकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। नीरज शर्मा के लिए यह केवल व्यंजनों की बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी जन्मभूमि की संस्कृति, परंपरा और स्वाद को दूसरे प्रदेश के लोगों तक पहुंचाने का एक आत्मीय प्रयास है।
नीरज शर्मा का छत्तीसगढ़ से जुड़ाव कई वर्षों पुराना है। वे हर साल राज्योत्सव में अपना स्टॉल लगाने के लिए कोटा से रायपुर पहुंचते हैं। इसके अलावा बिलासपुर के व्यापार मेले में भी नियमित रूप से भाग लेते हैं। छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले शादी-विवाह और अन्य पारिवारिक आयोजनों में भी वे राजस्थानी व्यंजन परोसते हैं। लगातार यहां आने और स्थानीय लोगों से जुड़ने के कारण अब वे छत्तीसगढ़ में एक परिचित चेहरे बन चुके हैं।
छत्तीसगढ़ के प्रति अपने अनुभव साझा करते हुए नीरज शर्मा कहते हैं, “यहां हिंदी का खूब उपयोग होता है, इसलिए बात करने और कारोबार करने में कोई दिक्कत नहीं होती। यहां की भाषा सबसे सुविधाजनक है। यहां के लोग घर जैसा व्यवहार करते हैं। मुझे कभी नहीं लगा कि मैं दूसरे प्रदेश में हूं। छत्तीसगढ़ मुझे अपने ही प्रदेश जैसा लगता है।”
नीरज शर्मा के ये अनुभव छत्तीसगढ़ की सहजता, सहयोग और आत्मीय मेहमाननवाजी को दर्शाते हैं। यहां की संस्कृति और लोगों का व्यवहार दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को भी अपनेपन का एहसास कराता है। यही वजह है कि नीरज शर्मा जैसे कारोबारी हर साल यहां लौटते हैं और स्थानीय लोगों के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में नीरज शर्मा की मौजूदगी इस बात का उदाहरण है कि यह आयोजन केवल राज्य की स्थापना और उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि देश की अलग-अलग संस्कृतियों को एक मंच पर जोड़ने का अवसर भी है। यहां छत्तीसगढ़ अपनी लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए दूसरे राज्यों की कला, संस्कृति और खान-पान का भी खुले दिल से स्वागत कर रहा है। राजस्थान के पारंपरिक स्वाद से महकता नीरज शर्मा का स्टॉल इसी सांस्कृतिक एकता और आपसी अपनत्व की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहा है।










