एक ताजा शोध में बताया गया है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों को किसी भी लक्षण का अनुभव करने से पहले पहचाना जा सकता है। अंतत: प्रारंभिक अवस्था में रोग को कमजोर करने के लिए दवा का उपयोग करने में सक्षम हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का यह निष्कर्ष नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।
लंबे समय से ज्ञात है कि अल्जाइमर से जुड़े दो प्रोटीन हैं-बीटा-एमिलाइड, जो मस्तिष्क में प्लाक बनाता है, और टाऊ, जो बाद के चरण में मस्तिष्क की कोशिकाओं के अंदर जमा हो जाता है। यही इसके निदान का आधार देते हैं। स्केन यूनिवर्सिटी अस्पताल में न्यूरोलाजी के वरिष्ठ चिकित्सक और स्विटजरलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओस्कर हैनसन बताते हैं कि मरीज में किसी भी स्पष्ट लक्षण का अनुभव होने से पहले दस से बीस साल के बीच मस्तिष्क में परिवर्तन होते हैं। यह केवल तभी होता है जब टाऊ फैलना शुरू हो जाता है, जिससे तंत्रिका कोशिकाएं मर जाती हैं और व्यक्ति पहली बार याददश्त की समस्याओं का अनुभव करता है। यही कारण है कि अपने शुरुआती चरणों में अल्जाइमर का निदान इतना मुश्किल है।
प्रो. हैनसन के नेतृत्व में स्वीडन, अमेरिका, नीदरलैंड और आस्ट्रेलिया के 1,325 प्रतिभागियों ने अध्ययन में भाग लिया। हैनसन कहते हैं कि यदि हम याददाश्त कमजोर होने की चुनौतियों के प्रकट होने से पहले रोग का निदान कर सकते हैं, तो हम अंतत: प्रारंभिक अवस्था में रोग को धीमा करने के लिए दवा का उपयोग करने में सक्षम हो सकते हैं।










