रायपुर, 16 मई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुणदेव गौतम को स्थायी डीजीपी नियुक्त कर दिया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में उनकी नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दी गई है।
सरकारी आदेश के मुताबिक, यह नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अनुशंसा पर गठित पैनल से की गई है। इस पैनल में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हिमांशु गुप्ता का नाम भी शामिल था।
गौरतलब है कि पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के सेवानिवृत्त होने के बाद 4 फरवरी 2025 को अरुणदेव गौतम को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था। वे करीब सवा साल से इस पद पर कार्यरत थे और अब उन्हें स्थायी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
नियुक्ति प्रक्रिया और पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह मामले’ में दिए गए निर्देशों के अनुसार किसी राज्य में लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति नहीं की जा सकती। इसी दिशा में यूपीएससी की प्रक्रिया के तहत स्थायी डीजीपी की नियुक्ति सुनिश्चित की गई।

अरुणदेव गौतम का अनुभव
1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को प्रशासनिक अनुभव का लंबा कार्यकाल प्राप्त है। वे राजनांदगांव, बिलासपुर और बस्तर जैसे संवेदनशील जिलों में एसपी और आईजी रह चुके हैं।
झीरम घाटी घटना के बाद उन्हें बस्तर आईजी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जहां उन्होंने चुनावी सुरक्षा व्यवस्था को सफलतापूर्वक संभाला। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक और भारतीय पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है
सात जिलों का अनुभव
अरुण देव गौतम यूपीएससी निकालकर 1992 बैच के आईपीएस बने। 12 अक्टूबर 1992 को उन्होंने आईपीएस की सर्विस ज्वाइन की। उन्हें पहले मध्यप्रदेश कैडर एलॉट हुआ था। प्रशिक्षु आईपीएस के तौर पर उनकी जबलपुर में पोस्टिंग हुई। फिर वे बिलासपुर के सीएसपी बने। बिलासपुर के बाद एसडीओपी कवर्धा और फिर एडिशनल एसपी भोपाल बने। मध्य प्रदेश पुलिस की 23वीं बटालियन के कमांडेंट भी रहे। एसपी के रूप में पहला जिला उनका राजगढ़ रहा।
अरुण देव गौतम के बारे में रोचक जानकारी
अरुण देव गौतम को प्रशासनिक और पुलिसिंग अनुभव के लिहाज से प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों में गिना जाता है। किसान परिवार के अरुण देव उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अभयपुर गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को हुआ। वे पांच भाई और एक बहन हैं। उन्होंने आठवीं तक की स्कूली शिक्षा अपने गांव के ही सरकारी स्कूल से की, फिर आगे की पढ़ाई के लिए अपने बड़े भाई के पास प्रयागराज आ गए। राजकीय इंटर कॉलेज इलाहाबाद से दसवीं और बारहवीं पूरी करने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आर्टस लेकर बीए और फिर राजनीति शास्त्र में एमए किया। इलाहाबाद में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के दौरान उनके कई दोस्तों ने यूपीएससी क्लियर कर लिया। इसको देखते गौतम ने ठान लिया कि वे भी देश की सबसे बड़ी इस प्रतियोगी परीक्षा पास करेंगे। इसके बाद वह जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी नई दिल्ली एडमिशन ले लिया। वहां से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की। इसके बाद पीएचडी किया। यूपीएससी परीक्षा में पहली बार असफल रहने के बाद अरुण देव गौतम ने दूसरी बार कोशिश की और दूसरी बार मे आईपीएस सलेक्ट हो गए।










