दीपावली और छठ जैसे त्योहारों के कारण जहां स्पेशल ट्रेनों की वेटिंग लिस्ट है। वहीं रेलवे का सॉफ्टवेयर हैक कर फर्जी ई-टिकट जारी करने का धंधा भी बेखौफ जारी है। त्योहार पर उमडी इसी भीड का फायदा उठाकर रेल यात्रियों को ठगा जा रहा है। ये दलाल एक ही आईडी से कई टिकट निकालकर मनमाना दाम वसूला जा रहा है। रेल यात्रियों को चूना लगाने के लिए दलालों ने एक नया तरीका ईजाद किया है। रेलवे या आईआरसीटीसी के अधिकृत पोर्टल से मिलती जुलती वेबसाइट बनाकर चूना लगाया जा रहा है।
आरपीएफ के अनुसार एक सप्ताह में ऐसे आठ फर्जी पोर्टल पकड़े गए हैं। ये फर्जी पोर्टल अधिकृत पोर्टल से तेज काम करते हैं। इससे दलालों का धंधा फल फूल रहा है। आईआरसीटीसी ने निजी आईडी बनाकर भी रेल टिकट बुक करने की सुविधा दी है, ताकि भीड़ से छुटकारा मिले, लेकिन कुछ लोग इस आईडी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
यदि आपने भी आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर पर्सनल आईडी बनाकर रेल टिकट बेचने वाले एजेंटों से टिकट बुक कराई है तो सावधान हो जाएं। इस प्रकार के टिकट के लिए न सिर्फ यात्रियों से ज्यादा कीमत वसूली जाती है, बल्कि यात्री इन टिकटों पर सफर नहीं कर पाएंगे, क्योंकि आरपीएफ उन्हें फौरन रद्द करवा देगी। ऐसे में टिकट बुक करते समय ध्यान रखना जरूरी है कि पीआरएस काउंटर या आरसीटीसी की अधिकृत वेबसाइट से ही टिकट खरीदें। दलाल सिर्फ मंहगा टिकट बेचकर संतुष्ट नहीं है, वे तत्काल बुकिंग सेवा पर भी सेंध लगा रहे हैं। फर्जी वेबसाइट बनाकर काउंटर पर से भी कम समय में ही ये दलाल टिकट बुक करने में कामयाब हो रहे हैं।
उत्तर रेलवे के सहायक वणिज्य प्रबंधक नरेश सिंह ने बताया कि फर्जी टिकटों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे एक्ट 1989 की धारा 143 के अंतर्गत टिकट दलाली करने पर तीन साल की कैद और दस हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। आरपीएफ की टीम के साथ मिलकर लगातार ऐसे लोगों को दंडित किया जा रहा है। मंडल में यह अभियान 20 नवंबर तक चलाया जाएगा।










