चश्मे बेचने वाले इस शख्स की ब्याज पर ब्याज नहीं देने की थी जिद्द

लोन मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज देश के बड़े फैसलों में शुमार है। आज लोन मोरेटोरियम के बारे में लोन चुकाने वाला हर व्‍यक्ति जानता है। मगर यह बात कम ही लोग जानते हैं कि देश के इस बड़े फैसले के पीछे चश्मा बेचने वाला एक शख्स है। उत्‍तर प्रदेश के आगरा में चश्मे की दुकान चलाने वाले गजेंद्र शर्मा की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम पर यह फैसला दिया है। इस फैसले का सीधा फायदा देश के करीब 16 करोड़ उनलोगों को होगा, जिन्‍होंने दो करोड़ से कम का लोन लिया है। केंद्र सरकार ने ऐसे लोगों को राहत देने के लिए 6500 करोड़ रुपये का फंड निर्धारित किया है।

गजेंद्र शर्मा के चश्मा की दुकान ताजमहल से कुछ मील की दूरी पर है। मोरेटोरियम के तहत ब्याज पर ब्याज की लड़ाई कोर्ट में शर्मा ने ही शुरू की। उनकी जिद्द थी कि वे ब्याज पर ब्याज नहीं देंगे। इसके लिए उन्होंने 120 वकीलों की फौज खड़ी कर दी थी। यही वह फौज थी, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची और सरकार को जवाब देने में पसीने छूट रहे थे।

गजेंद्र शर्मा आगरा की संजय प्लेस मार्केट में चश्मे की दुकान चलाते हैं। वह यहां नज़र के और सन ग्लास बेचते हैं। इसके साथ ही उनकी एक पहचान समाजसेवी के रूप में भी है। मीडिया के साथ खास बातचीत में गजेंद्र शर्मा ने बताया कि मुझे खबरें पढ़ने और सुनने की आदत है। इसी के चलते लॉकडाउन के दौरान पता चला कि जो लोन की किश्त नहीं भरेगा तो उसे बाद में ब्याज के साथ जमा करनी होगी। इसमें भी लेट हो गए तो ब्याज पर भी ब्याज लगेगा। बस यहीं से ठान लिया कि इस मामले में खुद भी राहत लूंगा और दूसरों को भी दिलाने की कोशिश करूंगा।

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गजेन्द्र शर्मा कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान हम अपने लोन की किश्त नहीं दे पा रहे थे, लेकिन यह हमारी नाकामी नहीं थी, यह तो लॉकडाउन के दौरान दुकान-कारोबार बंद होने की वजह से मजबूरी थी। जब धंधा ही नहीं है तो किश्त जमा करने के लिए पैसे कहां से लाएं। अब जब हमारी नाकामी नहीं है तो खमियाजा हम क्यों भुगतें। इन्हीं सब सवाल-जवाब के चलते मैंने अपने एडवोकेट बेटे से सलाह-मश्विरा किया और वकीलों से मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। असल में यह मामला था राइट टू लिव का। इसी को आधार बनाकर हमने याचिका दाखिल की। हम नेक काम करने जा रहे थे और करोड़ों लोगों की दुआएं साथ थीं तो फैसला हमारे हक में आया।

वित्त मामलों के जानकार बताते हैं कि लॉकडाउन के 6 महीनों के दौरान जो भी ऐसे मामले होंगे जहां ब्याज पर ब्याज लगेगी तो ऐसे ब्याज को केन्द्र सरकार चुकाएगी और इससे केन्द्र सरकार पर करीब 6500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। वहीं 2 करोड़ से नीचे के करीब 16 करोड़ लोन धारकों को इसका फायदा मिलेगा।

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