रायपुर। संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की नवप्रवेशित छात्राओं के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं को सम्मानित भी किया गया।
नवप्रवेशित छात्राओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। यह यात्रा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्राओं को जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक बनाने वाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश के साथ छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बन गई हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश देने का कार्य किया है।
राज्यपाल ने महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज की कल्पना भी अधूरी है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में उपलब्ध संसाधनों और अवसरों के प्रति संतुष्ट रहने के साथ-साथ भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनेक अवसर और क्षेत्र मौजूद हैं। किसी एक क्षेत्र में सफलता नहीं मिलने पर निराश होने की जरूरत नहीं है। छात्राओं को नए अवसर तलाशने चाहिए और अपनी क्षमता के अनुरूप दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
रमेन डेका ने कहा कि जीवन निरंतर सीखने की प्रक्रिया है और व्यक्ति जीवनभर विद्यार्थी बना रहता है। आज की पीढ़ी इंटरनेट युग की विद्यार्थी है और तकनीक ने ज्ञान प्राप्त करने के नए रास्ते खोले हैं। हालांकि, तकनीक पर पूरी तरह निर्भर होना उचित नहीं है। इंटरनेट से जानकारी और ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन मानव बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता का स्थान तकनीक नहीं ले सकती।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि ज्ञान हासिल करने के साथ उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना भी जरूरी है। जीवन को सरल, सार्थक और बेहतर बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल समझदारी के साथ किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने छात्राओं को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि हमें केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि समाज और देश ने हमें क्या दिया है। इसके साथ यह भी विचार करना चाहिए कि हम अपने समाज, पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है और इसे अनावश्यक चिंताओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। छात्राओं को वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए मेहनत और निरंतर प्रयास करना चाहिए। लगातार किए गए प्रयास भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों का योगदान अमूल्य है और इसे धन के आधार पर नहीं आंका जा सकता। शिक्षकों को अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे छात्राएं उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।
राज्यपाल ने छात्राओं से समाज के लिए छोटे-छोटे सकारात्मक कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे प्रयास जब सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं, तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं को उनकी मेहनत, लगन और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्यपाल रमेन डेका ने सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने वाली छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने उन्हें भविष्य में भी निरंतर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, संत युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।










