रायपुर,(पूनम ऋतु सेन)। बस्तर अंचल के दंतेवाड़ा जिले में ऐतिहासिक धरोहरों की भूमि बारसूर स्थित है। पुरातन काल में 147 बड़े मंदिरों और 147 तालाबों के साथ अन्य छोटे-छोटे मंदिर इस स्थल की महत्ता प्रदर्शित करते हैं। इन्हीं मंदिरों के एक समूह में गणेश जी की युगल मूर्तियां प्राप्त हुई है।
कैसे पहुँचे बारसूर? क्या है इस स्थल की विशेषता? राजधानी रायपुर से दक्षिण दिशा में 395km की दूरी में दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर पश्चिमी ओर बारसूर है। मंदिरों और तालाबों की नगरी के नाम प्रसिद्ध स्थल नागवंशियों का गढ़ था।
इन्हीं नागवंशियों की एक शाखा छिन्दक नागवंशो के संरक्षण से बारसूर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। वर्तमान में कुछ वर्षों पूर्व तक केवल 5-6 तालाब और गिने चुने मन्दिर के विद्यमान होने के कारण यह स्थल अपनी पुरातन सम्यानुसार प्रसिद्धि खो चुका है किंतु पुरातत्व और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से इस स्थल के पुरावशेष और धरोहरों को संजोया जा रहा है।
बारसूर का गणेश मंदिर मामा-भांजा,बत्तीसा और चन्द्रादित्य मंदिर जैसे प्रमुख मंदिरों के बीच बारसूर का गणेश मंदिर अपनी अलग पहचान बनाता है। इसकी विशेषता यहाँ गणेश जी की युगल मूर्तियों का मिलना है।
प्रस्तर निर्मित एक मूर्ति 7 फीट की तो दूसरी लगभग 5 फ़ीट की है। बड़ी मूर्ति को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा के रूप में चिन्हांकित किया गया है।
पूर्वाभिमुखी वाले इस गणेश मंदिर की विशाल प्रतिमा वास्तुकला और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत मनमोहक है जबकि छोटी प्रतिमा उपरी हिस्से से हल्का सा खण्डित अवस्था में है, ऐसा शायद उत्खनन के दौरान हुआ हो। गणेश प्रतिमाओं के साथ ही अन्य कई हिन्दू देवी देवताओं की प्रस्तर प्रतिमायें भी इसी मंदिर प्रांगण में रखी हुई हैं।
आँचलिक मान्यताएं और इतिहास अंचल में प्रचलित जनश्रुतियो के अनुसार बाणासुर नामक एक शासक था, जिसकी नगरी बाणासुर थी, उनकी 2 बेटियाँ थी जो गणेश भक्त थी। उनकी आस्था और धार्मिक विश्वास को देखते हुये अपनी बेटियों के लिए राजा ने 2 गणेश प्रतिमायें बनवायी और एक मंदिर का निर्माण करवाया जहां बेटियां आकर गणेश जी का वंदन कर सके लेकिन ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार ये कथायें निराधार बतायीं गई हैं।
इन सभी तथ्यों के ऊपर नजर डालने पर बारसूर नगरी की ऐतिहासिकता, भव्यता और स्थापत्य कला की दृष्टि से अनोखी प्रतीत होती है। सघन वन और पहाड़ी क्षेत्र के बीच बसा यह स्थल पर्यटकों के लिए अचंभित करने वाला स्थल है। आँचलिक रूप से यहाँ के सभी मंदिर सामान्य जन के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक आस्था के केंद्र है।
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