कार्तिक पूर्णिमा का शास्त्र में विशेष महत्व है। आज देव दिवाली मनाई जायेगी साथ ही भगवान विष्णु और तुलसी मां की पूजा भी की जायेगी। दान और स्नान के इस पर्व की कुछ खास बात हम आज आपको बताएंगे।कार्तिक पूर्णिमा पर लक्ष्मी जी की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन लक्ष्मी स्तुति और लक्ष्मी मंत्रों का जाप करना शुभ माना गया है। लक्ष्मी जी की पूजा आर्थिक समस्याओं को दूर करती है। मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर लक्ष्मी जी की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन लक्ष्मी स्तुति और लक्ष्मी मंत्रों का जाप करना शुभ माना गया है। लक्ष्मी जी की पूजा आर्थिक समस्याओं को दूर करती है।

पूर्णिमा के दिन दान-स्नान का है विशेष महत्व-
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर देवता पृथ्वी पर आकर गंगा में स्नान करते हैं इसलिए इस दिन गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए या फिर पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। इसी के साथ पूर्णिमा पर क्षमतानुसार अन्न वस्त्र का दान करना चाहिए। पूर्णिमा तिथि पर चावलों का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि पर दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

लक्ष्मी नारायण की पूजा
पूर्णिमा तिथि पर व्रत रखकर भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी का पूजन करना चाहिए व चंद्रमा दर्शन करने के साथ ही अर्घ्य भी देना चाहिए। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर व्रत करने से सूर्य लोक की प्राप्ति होती है। लक्ष्मी नारायण का पूजन करने से आपके परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

शुभ योग बन रहा है
पंचांग के अनुसार इस दिन यानि कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि नामक योग और वर्धमान योग भी बन रहा है जो इस दिन की पूजा के महत्व में वृद्धि कर रहे हैं।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही त्रिपुरासुर राक्षस का हुआ था वध
कथा के अनुसार, भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर के अंत के बाद उसके आंतक से मुक्ति मिलने पर सभी देवतागण प्रसन्न हुए और उन्होंने स्वर्ग में दीप जलाएं। इसके बाद सभी भोलेनाथ की नगरी काशी में पधारे और काशी में भी दीप प्रज्जवलित कर देवताओं ने खुशी मनाई।










