Google Analytics Meta Pixel Ekhabri विशेष: आज करें मां चंद्रघंटा की आराधना, प्रेतबाधा से हैं परेशान - भय बाधा होगी दूर - Ekhabri.com

Ekhabri विशेष: आज करें मां चंद्रघंटा की आराधना, प्रेतबाधा से हैं परेशान – भय बाधा होगी दूर

Ekhabri धर्म दर्शन। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के स्वरूप का पूजा किया जाता है। मां चंद्रघंटा के गले में सफेद फूलों की माला होती है। मान्यता है की मां चंद्रघंटा की पूजा से समस्त पाप व बाधाएं ख़त्म हो जाती हैं। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक पराक्रमी व निर्भय हो जाता है। देवी की आराधना करने से प्रेतबाधा से भी रक्षा होती है।

 

ऐसा है देवी का मोहक स्वरूप:

देवी के इस स्वरूप के दस हाथ हैं जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुसज्जित हैं। मां के दस हाथो के अस्त्र शस्त्र में घंटा, तलवार, पुष्प, गदा, धनुष, बाण, त्रिशूल, खड्ग, खप्पर, चक्र हैं। देवी की उत्पत्ति की अगर बात करें तो त्रिदेवों ने देवताओं की बात सुनी और क्रोध प्रकट किया, जिससे एक ऊर्जा निकली उस ऊर्जा से एक देवी प्रकट हुई जिनका नाम चंद्रघंटा है।

इन्हे भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल, विष्णुजी ने अपना चक्र, इंद्र ने अपना घंटा, सूर्य ने अपना तेज और तलवार और सिंह प्रदान किया।इसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और स्वर्ग लोक की रक्षा की। मां त्रिनेत्रधारी है। इनकी तीसरी आंख नित्य खुली हुई रहती है। माता का वाहन शेर है। मां के शीश पर आधा चंद्र है जिसके कारण इस रूप को चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का वाहन शेर है इसलिए महादेवी भी कहते है। मां चंद्रघंटा का रंग सोने के समान चमकीला है। मां की मुद्रा संकटों से बचाने वाली युद्ध के लिए तत्पर वाली होती है।

इस मंत्र से मां की पूजा करनी चाहिए:

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ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:

 

मां की पूजा कैसे करनी चाहिए: 
मां की पूजा में रक्त वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना गया है।

सुगंधित पुष्प धूप दीप नैवेद्य पाटला के माला ( गुलाब ) और कमल के साथ मां चंद्रघंटा की पूजा करने से घर में सुख की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।

इन चीजों का लगाएं भोग: 

मां के भोग प्रसाद में दूध का उपयोग करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है केसर युक्त खीर, लौंग, इलाइची, पंचमेवा, दूध से बनी मिठाइयां, मिसरी, और खोवे के पेड़े का भोग लगाया जाता है। मां को शहद का भोग भी लगाया जाता है।

 

मां चंद्रघंटा का जाप मंत्र –

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चन्द्रघण्टा यशस्विनीम्॥

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