मोर को अपनी खासियत नही पता होता और वह कस्तूरी की खुशबू की तलाश में लगा रहता है। हमारे साथ भी कभी कभी ऐसा होता है। हम अपनी क्षमता को नही आंक पाते और खुद इसको खोज दूसरों में करने लगता हैं।
बेहतर यह होगा कि खुद का परीक्षण पहले स्वयं करें उसके बाद प्रयास करने की कोशिश करे। पहले से ही हार मानना कोई कायरता से कम नही है। इस लिए मोर न बनें बल्कि खुद का साथ दे और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े।









