रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर विभाग की प्रमुख योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में प्रधानमंत्री ई-बस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना और 15वें वित्त आयोग से संबंधित कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई।
बैठक में प्रमुख सचिव ने योजनाओं के क्रियान्वयन में जनसुविधा, वित्तीय व्यवहार्यता, समयबद्धता और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा कराने को कहा। बैठक में सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
ई-बसों के लिए जनसुविधा आधारित रूट प्लान
प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत रायपुर में ई-बस संचालन को अधिक व्यवस्थित और जनोपयोगी बनाने के लिए व्यापक रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए। प्रमुख सचिव ने कहा कि बस रूट तय करते समय शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के साथ स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को भी जोड़ा जाए। इसका उद्देश्य शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना और अधिक से अधिक लोगों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने प्रस्तावित रूटों की व्यवहारिकता, यात्री आवागमन और कनेक्टिविटी का विस्तृत आकलन करने के लिए सर्वे प्लान तैयार करने को कहा। इसके साथ ही पीपीपी मॉडल के आधार पर बस स्टॉप की सूची तैयार करने और यात्रियों की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उनके स्थान निर्धारित करने के निर्देश दिए गए।
किफायती किराया और तकनीक आधारित परिवहन पर जोर
ई-बस सेवा के लिए यात्रियों की सुविधा और आम नागरिकों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए युक्तिसंगत किराया निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया। प्रमुख सचिव ने ई-बस योजना को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया।
बस रूट, बस स्टॉप, बसों की उपलब्धता और यात्री सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाओं को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके।
30 सितंबर तक पूरे करने होंगे निर्माणाधीन आवास
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत निर्माणाधीन आवासों को 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। प्रमुख सचिव ने नगरीय निकायों में शेष और निर्माणाधीन आवासों की संख्या के आधार पर साप्ताहिक लक्ष्य तय कर विशेष अभियान चलाने को कहा।
उन्होंने कहा कि आवास निर्माण को मिशन मोड में पूरा किया जाए और प्रत्येक नगरीय निकाय स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा हो। जिन स्थानों पर निर्माण की गति धीमी है, वहां आवश्यक समन्वय कर कार्यों में तेजी लाई जाए।
जिला कलेक्टरों को भी शेष आवासों के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। जिला प्रशासन और नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय से लंबित आवासों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने पर जोर दिया गया।
प्रमुख सचिव ने आवास निर्माण में आने वाली तकनीकी, प्रशासनिक और अन्य समस्याओं की समयबद्ध पहचान कर उनका समाधान सुनिश्चित करने को कहा। हितग्राहियों को आवास निर्माण की वास्तविक प्रगति के आधार पर योजना के प्रावधानों के अनुरूप किस्त की राशि समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए वित्तीय मॉडल की समीक्षा
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए चिन्हित क्लस्टरों, तकनीकी व्यवहार्यता और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने कहा कि ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके लिए तकनीकी व्यवहार्यता के साथ दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का आकलन भी जरूरी है।
उन्होंने राज्य सरकार और नगरीय निकायों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय दायित्व का समग्र आकलन करने के निर्देश दिए। परियोजनाओं के संचालन और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों का यथार्थपरक अनुमान तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
पीपीपी मॉडल में निजी भागीदारी का आकलन
बैठक में वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की संभावित भागीदारी पर भी चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने सक्षम और अनुभवी निजी भागीदारों की उपलब्धता, निवेश में उनकी रुचि और उनकी अपेक्षाओं का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने राज्य सरकार, नगरीय निकायों और निजी क्षेत्र के बीच जिम्मेदारियों तथा वित्तीय सहभागिता का संतुलित निर्धारण सुनिश्चित करने को कहा। इसका उद्देश्य परियोजनाओं को व्यावहारिक और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है। उन्होंने प्रस्ताव को जल्द अंतिम रूप देकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
15वें वित्त आयोग के कार्यों की बेहतर प्लानिंग पर जोर
प्रमुख सचिव ने 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि का उपयोग समुचित और दीर्घकालिक योजनाओं के आधार पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय निकायों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय जरूरतों का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार करने को कहा, ताकि सीमित संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग हो सके।
सड़कों के निर्माण और उन्नयन को लेकर उन्होंने समग्र योजना बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के कार्यों को अलग-अलग और बिखरे हुए तरीके से करने के बजाय शहर की मौजूदा अधोसंरचना, यातायात दबाव, कनेक्टिविटी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्राथमिकता तय की जाए।
गैप एनालिसिस के आधार पर होगा विकास कार्यों का चयन
बैठक में नगरीय निकायों में सैचुरेशन आधारित विकास पर भी चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके लिए सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य शहरी अधोसंरचना से जुड़ी कमियों की पहचान करने के लिए गैप एनालिसिस तैयार करने को कहा गया। गैप एनालिसिस के आधार पर प्राथमिकता तय कर कार्ययोजना तैयार करने से विकास कार्यों को अधिक लक्षित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया गया।
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