शिव जी का परम भक्त होने के बाद भी रावण उन्हें कैलाश से लंका में निवास के लिए नहीं ले जा पाया। इसका सबसे बड़ा कारण उसका अहंकार था जो, उसकी भक्ति पर हावी हो गया और शिव जी को प्रिय होने के बाद भी वह सफल नहीं हो पाया।
इस लिए ही कहा गया है अहंकार ही सबका विनाशक होता है इस लिए इसे हमेशा अपने से दूर रखना चाहिए। जब अहंकार हमारे भीतर आ जाए तो हमारी आत्मा भी सच्ची नहीं रह जाती। व्यक्ति को सरला को आत्मसार करना चाहिए जिससे वो सफल हो सके।










