महासमुंद जिले में रेत माफिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाते हैं। यहाँ बगनई नदी में खुले आम रेत की चोरी देखा जा सकता है। यही नहीं अवैध रेत जिले के आला अधिकारियों के बंगले से होकर गुजर रहा है। खनिज और राजस्व के रवैये के कारण रेत माफियाओं के हौसले इतना बुंलद है कि प्रशासन का कोई आदेश उनके लिए मायने नही रखता है।यही कारण है कि प्रशासन के सख्त आदेश के बाद भी अवैध रेत उत्खनन धडल्ले से जारी है और प्रशासन शिकायत का इंतजार कर रही है। अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन से अब ग्रामीण भी परेशान है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन जल्द कोई कार्यवाही नही करता है तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
दरअसल, महासमुंद मुख्यालय से 10 किमी की दूरी पर बसा है गांव लाफिनकला। लाफिनकला जिले का आखरी गांव है। लाफिनकला के दूसरे छोर पर गरियाबंद जिले का गांव लचकेरा है। दोनों गांव के बीच से बगनई सूखा नदी बहती है। सूखा नदी में कोई रेत घाट स्वीकृत नही है। इसके बावजूद रेत माफिया सूखा नदी का सीना चीरकर अवैध रेत का उत्खनन कर ट्रैक्टर से परिवहन कर रहे है। एक दिन में लगभग 80 ट्रैक्टर रेत अवैध उत्खनन कर परसकोल और हाउसिंग बोर्ड के रास्ते ले जा रहे है। रोड सकरा होने के कारण सड़क पर चलने वालों को इन अवैध रेत से भरी ट्रैक्टरों से काफी डर लगा रहता है। सड़क पर बच्चे भी खेलते रहते हैं।
ऐसा नही है कि अधिकारियों को इसका पता नहीं है, क्योंकि इसी रोड पर हाउसिंग बोर्ड में जिले के तमाम आला अधिकारी का भी निवास है। कलेक्टर बंगला, एसपी बंगला भी है। उसके बावजूद भी रेत माफिया धडल्ले से रेत का परिवहन कर ले जा रहे है। लाफिनकला के सरपंच को भी पता है कि अवैध रेत उत्खनन हो रहा है और शासन को लाखों का चुना लग रहा है।
ट्रैक्टर चालकों ने बताया कि कोई पटेल नामक व्यक्ति प्रत्येक ट्रैक्टर ट्राली वालों से मंदिर के नाम पर प्रति ट्रीप (चक्कर) 150 रुपये लेता है। अवैध रेत उत्खनन को लेकर महासमुंद एसडीएम ने आठ गांव के सरपंचों और सचिवों को आदेश जारी किया था कि जिस गांव में अवैध रेत उत्खनन होता पाया गया तो उसकी जिम्मेदारी वहाँ के सरपंच और सचिव की होगी। इसके बावजूद भी उन गांवों को छोड़कर कुछ और ग्रामों में अवैध रेत उत्खनन जारी है।
महासमुंद एसडीएम का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन व परिवहन की बात संज्ञान में आयी है। इसकी जांच कराकर उचित कार्यवाही की जायेगी।










