कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। केवल भारत में रोज 90 हजार से अधिक मामले आ रहे हैं। हालांकि इसकी दवा बनाने के लिए पूरी दुनिया के वैज्ञानिक जुटे हैं। पर किसी के हाथ बढ़ी सफलता हाथ नहीं लगी। इस बीच हैदराबाद की भारत बायोटेक कंपनी की वैक्सीन को दूसरे चरण के ट्रायल के लिए मंजूरी मिल गई है। इस वैक्सीन (COVAXIN) का जानवरों पर ट्रायल सफल रहा है। इस वैक्सीन का बंदरों के चार समूहों पर ट्रायल किया गया था। इस दौरान SARS-CoV-2 वैक्सीन के दो डोज दिए गए और उनकी निगरानी की गई।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि परिणामों ने ‘लाइव वायरल चैलेंज मॉडल’ में वैक्सीन की सुरक्षात्मक प्रभावकारिता का प्रदर्शन किया। हैदराबाद स्थित फर्म ने ट्वीट किया कि ‘भारत बायोटेक गर्व से ‘कोवैक्सीन’ के पशु अध्ययन परिणामों की घोषणा करता है। यह परिणाम एक लाइव वायरल चैलेंज मॉडल में सुरक्षात्मक प्रभावकारिता प्रदर्शित करते हैं।’ कोवैक्सीन’ गैर-मानव स्तनपायी प्राणियों में सर्वोच्च श्रेणी के जीव (बंदर, चमगादड़ आदि) पर अध्ययन के नतीजों से वैक्सीन की प्रतिरक्षा क्षमता (इम्युनोजीनिसिटी) का पता चलता है। कंपनी ने कहा कि ‘कोवैक्सीन’ ने बंदरों में वायरस के प्रति ऐंटीबॉडीज विकसित की।
भारत बायोटेक, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर कोरोना की वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ बना रहा है। स्वदेशी ‘कोवैक्सीन’ को ड्रग रेगुलेटरी से ट्रायल के दूसरे चरण की मंजूरी मिल गई है। दूसरे चरण में कोवैक्सीन का ट्रायल सात सितंबर से शुरू हो चुका है। भारत बायोटेक की इस वैक्सीन का पहले चरण में देश के कई अलग-अलग हिस्सों में परीक्षण किया जा चुका है। दूसरे चरण में 380 वॉलंटियर्स पर वैक्सीन का परीक्षण किया जा रहा है।
भारत बायोटेक वर्तमान में देश भर के कई अस्पतालों में कोरोना के मरीजों पर कोवैक्सीन के दूरसे चरण के नैदानिक परीक्षण का आयोजन कर रहा है। इसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली और पटना, विशाखापत्तनम में किंग जॉर्ज अस्पताल, हैदराबाद में निजाम का आयुर्विज्ञान संस्थान शामिल है। इसके साथ-साथ रोहतक पीजीआई में भी इसका परीक्षण चल रहा है।










