भारत ने मित्र राष्ट्र रूस को फिर संकेत दिया है कि यूक्रेन मुद्दे पर उसके समर्थन को वह गारंटी के तौर पर न ले। संयुक्त राष्ट्र आम सभा (यूएनजीए) में रूस की तरफ से यूक्रेन से जुड़े एक मुद्दे पर गुप्त मतदान कराने का प्रस्ताव लाया गया था। इसके विरुद्ध अल्बानिया खुले मतदान का प्रस्ताव लाया था। भारत ने तकरीबन सौ देशों के साथ अल्बानिया के प्रस्ताव के पक्ष में वोटिग की। यानी रूस की मांग खारिज हो गई।
अल्बानिया के प्रस्ताव के समर्थन में 107 वोट पड़े जबकि 13 देशों ने विरोध में मतदान किया। 39 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। रूस के प्रस्ताव को खारिज करते हुए अल्बानिया के राजनयिक ने कहा कि गुप्त मतदान कराने से महासभा की परंपराएं कमजोर होंगी। वहीं, यूक्रेन के प्रतिनिधि ने कहा कि मसौदा प्रस्ताव के लिए मतदान प्रत्येक देश के लिए, हमारे प्रत्येक नागरिक के लिए, आपके परिवारों के लिए, हमारे बच्चों के लिए और न्याय के लिए वोट होगा।
यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस को चौंकाया है। इसके पहले यूएन में यूक्रेन के राष्ट्रपति को भाषण देने से रोकने के लिए भी रूस एक प्रस्ताव लाया था जिसके खिलाफ भारत ने वोटिग की थी। वैसे यूक्रेन पर रूस के हमले (24 फरवरी, 2022) के बाद से भारत ने कई मौकों पर अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों की तरफ से रूस के विरुद्ध लाए गए प्रस्तावों पर अनुपस्थित रहकर परोक्ष तौर पर उसे समर्थन किया है। माना जा रहा है कि बुधवार को होने वाली एक वोटिग के दौरान भी भारत अनुपस्थित रह सकता है।
एक दिन पहले ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस और भारत के ऐतिहासिक रिश्तों को और गहरा करने की बात कर चुके हैं। ऐसे में भारत की तरफ से रूस की मांग के विरुद्ध मतदान भारत की कूटनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं है।










