Google Analytics Meta Pixel ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने कर ली तैयारी, न्यूक्लियर साइटों पर बढ़ाई सुरक्षा - Ekhabri.com

ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने कर ली तैयारी, न्यूक्लियर साइटों पर बढ़ाई सुरक्षा

अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत करने में जुटा है। हाल की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने एक संवेदनशील सैन्य परिसर में नई इमारत पर कंक्रीट की ढाल बनाई और उसे मिट्टी से ढक दिया है।

 

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिसर 2024 में इजराइल के हमले का निशाना बना था। तस्वीरों में यह भी दिखा कि ईरान ने एक परमाणु स्थल पर सुरंगों के प्रवेश द्वार मिट्टी से भर दिए हैं। इसके अलावा अन्य परिसर में सुरंगों के मुहाने मजबूत किए गए हैं और पिछले संघर्ष में क्षतिग्रस्त मिसाइल अड्डों की मरम्मत की गई है। यह गतिविधियां ऐसे समय सामने आई हैं जब वॉशिंगटन ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत कर रहा है, लेकिन विफल होने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा चुकी है।

 

 

 

तेहरान से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स ईरान का संवेदनशील सैन्य ठिकाना है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि दो दशक पहले यहां परमाणु बम से जुड़े परीक्षण हुए थे। अक्टूबर 2024 में इजराइल ने इस परिसर पर हमला किया था। हमले से पहले और बाद की तस्वीरों में आयताकार इमारत को भारी नुकसान पहुंचा दिखा। 6 नवंबर 2024 की तस्वीर में दोबारा निर्माण के संकेत मिले। 12 अक्टूबर 2025 की तस्वीर में नई संरचना का ढांचा और दो छोटी इमारतें दिखाई दीं। 14 नवंबर तक धातु की छत लगी, लेकिन 13 दिसंबर तक यह ढांचा आंशिक रूप से ढका नजर आया। 16 फरवरी की तस्वीर में इमारत पूरी तरह छिपी हुई थी।

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इंस्टिट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) ने 22 जनवरी की रिपोर्ट में बताया कि यहां ‘कंक्रीट सरकोफेगस’ बनाया जा रहा था। इमारत के अंदर लगभग 36 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा बेलनाकार चैम्बर देखा गया, जो उच्च विस्फोटक परीक्षण से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी संरचनाएं परमाणु हथियार विकास में अहम होती हैं, हालांकि इन्हें पारंपरिक हथियारों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

 

इस्फहान परिसर उन तीन यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों में से एक है, जिन्हें जून में अमेरिका ने निशाना बनाया था। यहां परमाणु ईंधन चक्र की सुविधाओं के अलावा भूमिगत क्षेत्र भी है, जहां संवर्धित यूरेनियम रखा जाता रहा। जनवरी के अंत में ली गई तस्वीरों में दो सुरंगों के प्रवेश द्वार मिट्टी से भरे गए और 9 फरवरी तक तीसरे प्रवेश द्वार को भी बंद कर दिया गया। इससे हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई का असर कम हो सकता है।

 

 

नतांज के पास पहाड़ के नीचे बने अन्य सुरंग परिसर के दो प्रवेश द्वार फरवरी से मजबूत किए जा रहे हैं। वहां डंप ट्रक, सीमेंट मिक्सर और भारी मशीनों की आवाजाही देखी गई। इसे ‘पिकैक्स माउंटेन’ कहा जाता है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। दक्षिणी ईरान में शिराज से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित शिराज साउथ मिसाइल बेस, 25 प्रमुख अड्डों में से एक है, जहां से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा सकती हैं। पिछले साल के संघर्ष में इसे हल्का नुकसान हुआ था। 3 जुलाई 2025 और 30 जनवरी की तस्वीरों में मरम्मत और सफाई का काम दिखा। हालांकि, यह अड्डा अभी पूरी क्षमता में नहीं लौटा है।

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कोम शहर से 40 किलोमीटर उत्तर में स्थित कोम मिसाइल बेस को मध्यम स्तर का नुकसान हुआ था। 16 जुलाई 2025 और 1 फरवरी की तस्वीरों में क्षतिग्रस्त इमारत पर नई छत दिखाई दी। मरम्मत 17 नवंबर के आसपास शुरू हुई और करीब 10 दिन में पूरी हुई। ईरान इन गतिविधियों के माध्यम से अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत कर रहा है, जिससे संभावित हमलों के प्रभाव को कम किया जा सके।

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