रायपुर, 25 फरवरी 2025 – बागेश्वर धाम में आयोजित शिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर 251 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह समारोह संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भाग लिया और समाज सेवा व धार्मिक समर्पण के इस अनूठे संगम की सराहना की।

धर्म, समाज सेवा और एकता का संगम
बागेश्वर धाम में धार्मिक भक्ति, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। वैदिक रीति-रिवाजों से 251 निर्धन कन्याओं का विवाह सम्पन्न हुआ। सभी नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी का संपूर्ण सामान प्रदान किया गया, जिससे उनके नए जीवन की शुरुआत सुखद हो सके।
मुख्यमंत्री का संबोधन: संस्कृति और संस्कारों का महत्व
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत परंपरा और धर्मनिष्ठा की भूमि है, जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय बिताया। उन्होंने कहा कि संस्कार और संस्कृति व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और बागेश्वर धाम का यह आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और सनातन धर्म की महिमा को पुनर्स्थापित करने का काम कर रहा है।
31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है। डबल इंजन सरकार के सहयोग से 31 मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सलवाद मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में सुरक्षा बल मजबूती से अभियान चला रहे हैं।
धर्मांतरण पर सख्ती और घर वापसी अभियान को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के धार्मिक और सांस्कृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए धर्मांतरण रोकथाम और घर वापसी अभियान को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के योगदान को याद करते हुए कहा कि सरकार धर्मांतरण के खिलाफ कठोर नीति अपनाएगी और समाज को उसकी मूल पहचान से जोड़ेगी।
मुख्यमंत्री की सरलता की सराहना
बाबा बागेश्वर (पूज्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) ने मुख्यमंत्री की सरलता और समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ की एक-एक जनता के हित के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका नेतृत्व राज्य को समृद्ध और शांतिपूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।”
उपमुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्यजन रहे उपस्थित
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज सेवा, आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस आयोजन में भागीदारी कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया और भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में योगदान देने का संकल्प लिया।









