मन बहुत ही चंचल होता है और इसे नियंत्रित करना कठिन है परन्तु अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।
ऐसा जरूरी नही की हर बातें हमारे मन के माफ़िक हो। अच्छा भी होगा और बुरा भी होगा ये हम पर है कि हम उसे किस मानसिकता के साथ स्वीकारते हैं। जब हमारे मन का नही होता तो ये विचलित हो जाता है और उस वक्त ही अपने मन को संभालना कठिन हो जाता है।
इस परिस्थितियों में अगर आप अपने आपको संभाल लिए तो आप जग जीत लिए।









