दिल्ली बम धमाके की जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो दोनों बीते लगभग तीन महीने से आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजावत-उल-हिंद के पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे। वे अक्सर अपने हैंडलर से बात करते थे। दिल्ली बम धमाके और फरीदाबाद में मिले 2921 किलो विस्फोटक समेत आतंक की पूरी कहानी अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 के कमरा नंबर 13 में रची जा रही थी। तीसरी मंजिल पर स्थित ये कमरा यहां कार्यरत डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब को अलॉट था। इसके बगल वाला कमरा दिल्ली धमाके में शामिल डॉ. उमर को अलॉट था, लेकिन उमर अपना कमरा छोड़कर मुज्जमिल के साथ ही रहता था।यूनिवर्सिटी के सूत्रों ने बताया कि दोनों बीते कई महीनों से काफी अच्छे दोस्त थे। वे यूनिवर्सिटी परिसर में अधिकतर समय एक साथ बिताते थे और एक-दूसरे से ही चर्चाओं का दौर रखते थे। इनके कई अन्य दोस्त भी थे जो अक्सर इनके साथ देखे जाते रहे हैं। जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो दोनों बीते लगभग तीन महीने से आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजावत-उल-हिंद के पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे। वे अक्सर अपने हैंडलर से बात करते थे। इसके चलते दोनों ही एक कमरे में अधिकतर समय रहते थे।










