नीतीश कुमार सात कार्यकाल में छह मंत्रियों के ले चुके हैं इस्तीफे

नीतीश कुमार बिहार की सत्ता पर सातवीं बार काबिज हुए हैं। इन सात कार्यकाल में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार आधा दर्जन मंत्रियों के इस्‍तीफे ले चुके हैं। हर बार मुख्‍यमंत्री नी‍तीश अपनी मिस्टर क्लीन छवि बचाए रखने के लिए इस्‍तीफा लेकर मंत्रियों को अपनी कैबिनेट से बाहर कर चुके हैं। हालांकि आरोपों से मुक्त होने के बाद उन्होंने कुछ मंत्रियों को दोबारा अपनी कैबिनेट में शामिल भी किया है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। विवादों में नाम आते ही मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने मेवालाल से इस्‍तीफा मांग लिया।

बिहार नीतीश की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी को पदभार ग्रहण करने के चंद घंटों के बाद ही इस्तीफा देना पडा। मेवालाल पहले मंत्री नहीं है,  जिनका विवादों में नाम आने के बाद नीतीश ने अपनी छवि को बनाए रखने के लिए इस्तीफा ले लिया हो। वह इससे पहले आधा दर्जन मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर कर चुके हैं।

इसके बावजूद नीतीश कुमार ने आजतक शपथ लेते ही अपनी कैबिनेट से किसी मंत्री को नहीं हटाया है। मेवालाल पहले ऐसे मंत्री हैं,  जिन्‍हें शपथ ग्रहण के बाद पदभार संभालते ही इस्‍तीफा देना पडा। नीतीश कुमार अक्टूबर 2005 में मुख्यमंत्री बने। अपनी पहली सरकार में ही उन्होंने मंत्री बनाने के 24 घंटे के भीतर जीतनराम मांझी का इस्तीफा लिया था। इसके बाद 2008 में रामानंद सिंह,  2011 में रामधार सिंह,  2015 में अवधेश कुशवाहा और 2018 में मंजू वर्मा को मंत्रिमंडल से हटा चुके हैं।

इस बार बिहार की तारापुर सीट से दूसरी बार जेडीयू के टिकट पर विधायक बने डॉ. मेवालाल चौधरी को नीतीश कुमार ने कैबिनेट में शामिल कर शिक्षा मंत्री का विभाग सौंपा था। मेवालाल कृषि विश्वविद्यालय के वीसी रहते हुए नियुक्ति घोटाले में आरोपित हैं। उन्हें कैबिनेट में जगह देकर नीतीश कुमार फंस गए थे। दरअसल एक दागी नेता को मंत्री बनाने पर विपक्ष ने मुख्‍यमंत्री नीतीश की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़े कर घेरना शुरू कर दिया था।

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