चीन और भारत के बीच तनातनी ने भारतीयों में स्वदेशी उत्पादों के प्रति प्रेम को जागृत कर दिया है। लोगों ने अचानक स्वदेशी सामान को तवज्जो देना शुरू कर दिया है। लोग ब्रांडेड विदेशी कपड़ों को छोड़कर स्वदेशी रंग में रंगने लगे हैं। एकाएक खादी के कुर्ते, पायजामा, गमछा, चादर और दरी की मांग बढ़ गई है।
पूर्वी लद्दाख के गलवन में भारतीय जवानों के शहादत के बाद चीनी सामान के बहिष्कार की मांग तेज हो गई है। भारत खादी भंडार के संचालक शशि बल्लेवार ने बताया कि उस घटना के बाद से खादी के उत्पादों की बिक्री में अचानक तेजी आ गई है। रेशम वाले खादी के उत्पाद भी बिक रहे हैं। युवाओं की पसंद रंग-बिरंगी खादी है, जिससे वे कुर्ते और शर्ट बनवा रहे हैं। हालांकि चीन से कपड़े बहुत कम आते हैं, लेकिन भारत-चीन विवाद के बाद खादी के कपड़ों की बिक्री 25 फीसद तक बढ़ गई है। बारिश के समय खादी के कपड़े बहुत जल्द सूख जाते हैं, इसलिए लुंगी, गमछा, टावेल की मांग सबसे ज्यादा है। साथ खादी के थ्री लेयर मास्क की भी मांग है, जिसकी कीमत 30 रुपये नग है। वहीं कॉटन के मास्क 150 रुपये में बिक रहे हैं।
बाजार की मांग को देखते हुए बुनकर तेजी से कपड़े बना रहे हैं। बुनकर मंगलू राम देवांगन ने बताया कि अनलॉक-1 से काम शुरू हुआ। फिर अचानक खादी की मांग बाजार में बढ़ गई। उन्होंने बताया कि उनके यहां के टावेल, गमछा समेत अन्य कपड़े रायपुर के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी जाते हैं। खादी की मांग बढ़ने से उनका काम भी बढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के अनुसार बाजार में पीटर पेल कलर कुर्ती, अलाइन कुर्ती, वन साइड जैकेट, खादी हैंड पेंटेड कुर्ती, अंब्रेला पैनर्ट, खादी क्रिल्ड कुर्ता, प्रिंटेड साड़ी और वर्क कुर्ता आदि उपलब्ध हैं। इन फैशनेबल कपड़े तैयार करने के लिए फैशन डिजाइनिंग के छात्रों की मदद ली जा रही है।
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