भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा झीरम कांड को लेकर की जा रही बयानबाजी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने कहा कि झीरम मामले की जांच एनआईए कर रही है। भाजपा नेता एनआईए से बोले-जिसका जिसका नार्को टेस्ट करावाना है, रोक कौन रहा है? वैसे नार्को टेस्ट तो रमन सिंह के सभी मंत्रीमंडल का होना चाहिए। तत्कालीन एडीजी नक्सल मुकेश गुप्ता का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए। बृजमोहन अग्रवाल का होना चाहिए, जिन्होंने षड्यंत्र कर झीरम का हमला करवाया था।
भाजपा सरकार और उनके नेताओं के समय यह हमला हुआ था। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि परिवर्तन यात्रा को अगर सुरक्षा दी गई होती तो क्या यह हमला होता? परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों वापस ली गई? किसने यह पूरा षड्यंत्र रचा था? इसलिए आवश्यकता है हुक्मरान का नार्को टेस्ट हो और वर्तमान में नार्को टेस्ट करने का अधिकार जिन एजेंसियों को है उसमे मुख्य आधार एनआईए को है एनआईए नहीं कर सकती तो फाइल वापस करे हमने एसआईटी गठित एक हफ्ते में इनका नार्को टेस्ट करवा देंगे।
इस बीच झीरम हमले के दसवीं बरसी पर बस्तर टाइगर स्वर्गीय महेंद्र कर्मा के पुत्र छविंद्र कर्मा ने दिया बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि झीरम घटना के बाद जो भी बचकर आये सबका नार्को टेस्ट होना चाहिए। आबकारी मंत्री कवासी लखमा और अमित जोगी की भी नार्को टेस्ट हो। सच्चाई सामने आनी चाहिए।
गौर हो कि बस्तर के दरभा झीरम घाटी में नक्सलियों ने 25 मई 2013 को देश के सबसे बड़े राजनीतिक हमले को अंजाम दिया था। इस नक्सली हमले में कांग्रेस की एक पीढ़ी समाप्त हो गई थी। इस हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याशरण शुक्ल, दिनेश पटेल सहित 32 लोगों नें जान दी। इस साल घटना को 10 साल पूरे हो चुके हैं।










