तस्वीर में सब साथ होते हैं, तकलीफ में……?
तस्वीर के साथ होने में और तकलीफ में साथ होने में बहुत से अंतर है।
तस्वीर के फ्रेम में आने के लिए हर कोई करीब आ जायेगा। लेकिन जब आप तकलीफ के दायरे में होंगे तो करीब कोई नही आना चाहेगा। कहने का अर्थ है सुख के साथी तो हजारों होंगे पर विपरीत परिस्थितियों में जो साथ हो वो ही असली हितैशी है।










