रूस और यूक्रेन के बीच महीनों से चल रही भीषण लड़ाई के बाद रूस ने यूक्रेनी सेना के गढ़ मारीपोल पर कब्जा कर लिया। शहर का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के बाद रूस ने सैकड़ों यूक्रेनी सैनिकों को अपने कब्जे वाले शहरों में भेज दिया है। इसे यूक्रेन की बड़ी हार माना जा रहा है। साथ ही महीनों से चल रहे युद्ध की समाप्ति की उम्मीद भी लगाई जा रही है। लंबे समय से रूस की भीषण बमबारी का सामना कर रहा मारीपोल अब लगभग मलबे में तब्दील हो चुका है। यूक्रेन का दावा है कि शहर के हजारों लोग इस युद्ध में मारे गए हैैं। इस बीच, जर्मनी के चांसलर ओलाफ शुल्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से फोन पर बात कर सैन्य व मानवीय स्थिति की जानकारी ली। मैक्रों ने आने वाले दिनों में यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति तेज करने का भरोसा दिया है।
रूस ने मारीपोल में 250 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों द्वारा समर्पण किए जाने का दावा किया है। दूसरी तरफ, यूक्रेनी सेना के जनरल स्टाफ ने एक बयान में कहा, ‘मारीपोल का गढ़ अपने युद्ध अभियान को पूरा कर चुका है। शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने यूनिट कमांडरों को सैनिकों के जीवन की रक्षा करने का आदेश दिया है… मारीपोल के रक्षक हमारे समय से हीरो हैैं।” उप रक्षा मंत्री अन्न मल्यार ने बताया कि 53 घायल सैनिकों को रूस के कब्जे वाले नोवोआजोवस्क, जबकि 211 लोगों को रूस समर्थित ओलेनिवका ले जाया गया है। इनकी रूसी सैनिकों के साथ अदला-बदली होगी। यूक्रेनी सेना ने कहा कि स्टील प्लांट में करीब 600 सैनिकों मौजूद थे।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि हम अपने योद्धाओं को बचाने में कामयाब होंगे। उनमें से कई गंभीर रूप से घायल हैैं, जिनकी देखभाल की जा रही है। यूक्रेन अपने नायकों को जीवित रखना चाहता है।” इस बीच, पश्चिमी सैन्य सूत्रों ने कहा है कि पुतिन इस युद्ध में काफी गहरे रूप से संलिप्त हो चुके हैं। वह किसी कर्नल या ब्रिगेडियर की तरह अभियान व युद्ध तकनीक के संबंध में निर्णय ले रहे हैैं। रूस ने आरोप लगाया है कि दुनिया की सात बड़ी आर्थिक शक्तियां (जी-7) रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को जब्त कर यूक्रेन के नाम पर उसका इस्तेमाल कर रही हैैं।










