एक जनवरी को मध्य रात्रि में नववर्ष के आगमन का उत्सव मना रहे रूसी सैनिकों पर यूक्रेनी राकेट हमले का सबसे बड़ा कारण मोबाइल फोन को माना गया है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ज्यादातर रूसी सैनिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए उनकी मौजूदगी को पुष्ट किया जा सका और एक स्थान पर उनकी भीड़ देखते हुए वहां राकेट दागे गए। यूक्रेन के रक्षा सूत्रों के अनुसार हमले में करीब चार सौ रूसी सैनिक मारे गए थे लेकिन बुधवार को रूस ने स्पष्ट किया कि उसके 89 सैनिक मारे गए थे। पहले माकीव्का के कालेज परिसर में 63 सैनिकों के मारे जाने की रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की थी।
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसकी सेना के नियंत्रण वाले डोनेस्क प्रांत की राजधानी माकीव्का में बने अस्थायी सैन्य ठिकाने से एक जनवरी (रविवार) को मध्य रात्रि में यूक्रेनी सेना के चार राकेट टकराए। घटना की जांच जारी है लेकिन शुरुआती जांच में पता चला है कि कालेज परिसर में मौजूद ज्यादातर सैनिक मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे और हमले के समय वे चालू हालत में थे। इसके चलते दुश्मन को उनकी मौजूदगी का पता लगाना और उन्हें निशाना बनाना आसान हो गया। रूस ने कहा है कि सैनिकों का ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल अवैध है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा आर्डर आफ करेज पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार सेमिओन पेगोव ने अपनी टेलीग्राम पोस्ट में कहा है कि सैनिकों पर मोबाइल के इस्तेमाल का आरोप बहुत आसान है। लेकिन यूक्रेन अन्य तरीकों से भी रूसी सैन्य ठिकाने का पता लगा सकता था।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि रूस का कोई भी जवाबी प्रहार विफल होगा। वैसे बुधवार को यूक्रेनी शहरों पर रूस की सेना ने सात मिसाइल और 85 से ज्यादा राकेट दागे। रूसी वायुसेना ने 18 हवाई हमले भी किए। ये हमले खेरसान, जपोरीजिया और क्रैमेटोर्स्क शहरों में हुए हैं। इन हमलों में कई नागरिकों के मारे और घायल होने की खबर है। डोनेस्क प्रांत के बाखमुट श्ाहर में भीषण लड़ाई जारी है। दोनों देशों की सेनाओं ने अपनी बढ़त के दावे किए हैं।
रूस के नियंत्रण वाले क्रीमिया के सेवास्तोपोल के गवर्नर मिखाइल राजवोझायेव ने बताया है कि उनके क्षेत्र में स्थित बेलबेक सैन्य हवाई ठिकाने के नजदीक बुधवार को दो संदिग्ध ड्रोन मार गिराए गए हैं। श्ाक है कि ये रूसी हवाई ठिकाने पर हमले के लिए आए थे। इस बीच यूक्रेन ने जपोरीजिया के परमाणु संयंत्र में शांतिरक्षक सैनिकों की तैनाती की मांग संयुक्त राष्ट्र से की है जिससे कि वहां पर दुर्घटना का अंदेशा कम किया जा सके। यूक्रेन का यह संयंत्र मार्च 2022 से रूसी सेना के कब्जे में है।










