अधिक मात्रा में आणविक क्षति उम्र संबंधी कमजोरियों व गंभीर बीमारियों के विकास में योगदान देती है। कुछ लोगों में यह आणविक प्रक्रिया अधिक तेज होती है। ऐसे में उम्र से पहले बुढ़ापे के लक्षण तेजी से उभरने लगते हैं। सौभाग्यवश, अनर्थकारी स्थिति में पहुंचने से पहले इस अवस्था का डिजिटल माडल (एजिग क्लाक) के जरिये पता लगाया जा सकता है। ऐसे माडल का इस्तेमाल व्यक्ति विशेष अथवा समूह पर पड़ रहे बुढ़ापे के प्रभाव के इलाज (एंटी-एजिग थेरेपी) में भी किया जा सकता है।
एजिग-यूएस नामक पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया लेख के अनुसार, एंटी-एजिग थेरेपी के लिए व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य पर भी गौर करना जरूरी है। अमेरिकी व चीनी विज्ञानियों के सहयोग से डीप लांगविटी के नेतृत्व में अकेलापन, ठीक से सो नहीं पाने या अप्रसन्न् रहने के प्रभावों को मापा गया।
अध्ययन के दौरान एक नए एजिग क्लाक का इस्तेमला किया गया, जिसमें चीन के 11,914 वयस्कों के रक्त व बायोमीट्रिक आंकड़ों की जांच की गई। एजिग क्लाक शरीर के मार्कर का इस्तेमाल कर जैविक उम्र बताने वाला टूल है। दिलचस्प रहा कि धूमपान करने वालों तथा लिवर व फेफड़ों के मरीजों पर तो बुढ़ापे का प्रभाव पाया गया, साथ ही मानसिक रूप से बीमार लोगों में भी उम्र से पहले बुढ़ापे के लक्षण्ा देखे गए। सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अकेले रहने वालों में भी दवा व इलाज की कम उपलब्धता के कारण उम्र से पहले बुढ़ापे का असर दिखाई दिया।










