दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। यही कारण है कि प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों के लिए भाजपा ने विशेष रणनीति तैयार कर ली है। इस बार भाजपा ने विकास, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को मुद्दा बनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश सभी जनपदों को करोड़ों रुपयों की सौगात देकर विकास को लेकर प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। साथ ही हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे को भी धार दे रहे हैं। काशी कॉरिडोर हो या अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण या दीपोत्सव की तैयारी सब इसी कड़ी का हिस्सा है। दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन में दरार और खटास देखने को मिल रही है। इसके बावजूद सपा समीकरणों को साधने में जुट गई है।
भाजपा का दावा है कि प्रदेश सरकार सभी 75 जनपदों के लिए काम कर रही है। प्रदेश के विकास के लिए जनता आशीर्वाद दिया है। हम उसका सम्मान करते हैं। जनता के मत का सम्मान करते हुए ही हमारी सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है। भव्य राम मंदिर निर्माण की बात हो या काशी कारिडोर की यह हमारे लिए आस्था का विषय है, चुनाव का नहीं। हम भगवान राम को अपनी आस्था का प्रतीक मानते हैं और 500 सालों के संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। एक बार फिर से जनता आशीर्वाद देकर केंद्र में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि उन्होंने लखनऊ के सबसे व्यस्त सड़क पर साइकिल चलाई, लेकिन उन्हें कहीं भाजपा का विकास नहीं दिखा। आखिर यह विकास कहां हो रहा है। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था हो या युवाओं को रोजगार देने का मुद्दा हो सरकार हर मुद्दे पर फेल है। सरकार विकास का ढिंढोरा पीट रही है हम मुद्दों पर चुनाव लड़ते हैं। उधर, कांग्रेस ने कहा कि अयोध्या में सड़कें तोड़ी जा रही हैं। घर तोड़े जा रहे हैं। चारों तरफ खौफनाक मंजर है। अयोध्या में अव्यवस्थाओं का अंबार है।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए विकास, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का अपना एजेंडा साफ कर दिया है और पार्टी उसको अमलीजामा भी पहनाने लगी है। पिछले दो चुनावों में भाजपा ने इसी एजेंडे पर सफलता पाई थी। वहीं सपा ने पिछड़े, यादव और मुस्लिम समीकरण पर काम करना शुरू दिया है। हालांकि कांग्रेस अभी आरोप तक सीमित है।










