गिले-शिकवे सिर्फ़ साँस लेने तक ही चलते हैं। बाद में तो सिर्फ़ पछतावे रह जाते हैं।
न जाने कौन सी शोहरत पर आदमी को नाज है, जबकि आखिरी सफर के लिए भी आदमी औरों का मोहताज है
हम अकेले कभी नही राह सकते जन्म से मरण तक हमारे और भगवान के बनाये रिश्ते ही हमारे इर्दगिर्द होते हैं।
जैसे प्यासे को पानी की एक एक बून्द की और भूखे को अन्न के एक एक दाने की कीमत का पता होता है, ठीक वैसे ही जिस इंसान के पास जो सुख नहीं होता,
वही उस सुख का सबसे बढ़िया वर्णन कर सकता है।










