Ekhabri धर्म दर्शन। नवरात्रि के नौ दिनों में छठा दिन माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। इस दिन साधक देवी कात्यायनी की आराधना कर उनसे विशेष कृपा की प्राप्ति की कामना करते हैं। माँ कात्यायनी को शक्ति और वीरता का प्रतीक माना जाता है। उनका वाहन सिंह है, जो उनके साहस और दृढ़ता का परिचायक है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय और रोगों से मुक्ति मिलती है।
माँ कात्यायनी का नाम ऋषि कात्यायन के नाम पर पड़ा, जिन्होंने उनकी तपस्या कर माँ को प्रसन्न किया। यह माना जाता है कि माँ कात्यायनी की पूजा करने से विशेष रूप से विवाहित जीवन में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है। कुंवारी कन्याएं उनके आशीर्वाद से योग्य वर की प्राप्ति के लिए भी प्रार्थना करती हैं।
प्रमुख मंदिर:
भारत में माँ कात्यायनी के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां भक्तजन नवरात्रि के छठे दिन विशेष पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। कुछ प्रमुख मंदिर इस प्रकार हैं:
Ekhabri कात्यायनी मंदिर, वाराणसी
1.कात्यायनी मंदिर, वाराणसी, (उत्तर प्रदेश)- वाराणसी के पक्का महाल में संकठा जी के मंदिर के पीछे आपका विग्रह स्थापित है। यह मंदिर आदि काल से यहीं है।
Ekhabri कात्यायनी मंदिर, छतरपुर दिल्ली
2. कात्यायनी मंदिर, छतरपुर, (दिल्ली)– नवदुर्गा का छठा स्वरूप कहलाने वाली मां राज राजेश्वरी पराम्बा कात्यायनी का मंदिर देश के छतरपुर में स्थित है. देवी के इस पावन सिद्धपीठ को संत बाबा नागपाल ने 1974 में बनवाया था. मान्यता है कि उससे पहले यहां पर सिर्फ एक कुटिया में बाबा देवी दुर्गा के इस पावन स्वरूप की पूजा किया करते थे, लेकिन शक्ति के परम साधक ने लोगों से भिक्षा लेकर इस विशाल मंदिर को बनवाया था. देवी कात्यायनी का यह मंदिर 70 एकड़ के विशाल क्षेत्र में दक्षिण भारतीय शैली में बना हुआ है।
3. अंबाजी मंदिर (गुजरात) – गुजरात का अम्बाजी मंदिर बेहद प्राचीन है। मां अम्बा-भवानी के शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के प्रति मां के भक्तों में अपार श्रद्धा है। इस मंदिर के गर्भगृह में मां की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। शक्ति के उपासकों के लिए यह मंदिर बहुत महत्व रखता है।
यहां मां का एक श्रीयंत्र स्थापित है। इस श्रीयंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगे कि मां अम्बे यहां साक्षात विराजी हैं।
Ekhabri मां कात्यानी, कानपुर
4. मां कात्यायनी देवी मंदिर कानपुर देहात (उत्तरप्रदेश) – कानपुर देहात का ख्याति प्राप्त कात्यायनी देवी का मन्दिर यमुना नदी के बीहड़ के उत्तरी क्षेत्र में मुगल रोड से शाहजहांपुर गांव से 6 किलोगीटर दूर दक्षिण में कथरी गांव में स्थित है। तहसील मुख्यालय भोगनीपुर से इस मन्दिर की दूरी 16 किलोमीटर है।।
इस दिन माँ कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति, समृद्धि, और सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। नवरात्रि का छठा दिन विशेष रूप से शक्ति, समर्पण और साधना का प्रतीक माना जाता है।
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