Ekhabri धर्म दर्शन। नवरात्रि का चौथा दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा को समर्पित होता है। माँ कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार माना जाता है, जिन्होंने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी। उनका नाम ‘कूष्मांडा’ का अर्थ है – ‘कू’ (छोटी), ‘उष्मा’ (ऊर्जा), और ‘अंड’ (ब्रह्मांड), यानी वह देवी जिन्होंने अपने प्रकाश से ब्रह्मांड की रचना की।
माँ कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि उनकी पूजा करने से रोगों का नाश होता है और भक्तों को शारीरिक व मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। नवरात्रि के चौथे दिन भक्त उपवास रखते हैं और देवी को मालपुआ का भोग अर्पित करते हैं। भक्त मां को सफेद पुष्प और श्वेत रंग के वस्त्र भी अर्पित करते हैं, जो शांति और शक्ति का प्रतीक होते हैं।
माँ कूष्मांडा के प्रसिद्ध मंदिर
भारत में माँ कूष्मांडा के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां भक्त दर्शन करने जाते हैं। कुछ प्रमुख मंदिर इस प्रकार हैं:
Ekhabri मां कुष्मांडा,कानपुर
1. कूष्मांडा देवी मंदिर, कानपुर (उत्तर प्रदेश) : यह मंदिर कानपुर के पास घाटमपुर में स्थित है और यहां मंदिर में स्थापित पिंडी रूप देवी प्रतिमा से सैदव रिसने वाला जल एक रहस्य है। आजतक कोई यह नहीं जान पाया कि जल कहां से प्रतिमा में आ रहा है। लेकिन, इस पवित्र जल को लेकर अटूट मान्यता और आस्था जुड़ी है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा और महोत्सव का आयोजन होता है।
2. अंबिकापुर कूष्मांडा मंदिर, छत्तीसगढ़ : यह मंदिर छत्तीसगढ़ में स्थित है और यहाँ पूरे वर्ष देवी के भक्तों का तांता लगा रहता है।
Ekhabri मां कुष्मांडा वाराणसी
3. कूष्मांडा देवी मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) : वाराणसी के इस मंदिर में नवरात्रि के समय विशेष आराधना की जाती है और यहाँ देवी के दर्शन के लिए भक्त बड़ी संख्या में आते हैं।
4. कूष्मांडा शक्तिपीठ, हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में स्थित यह शक्तिपीठ भी माँ कूष्मांडा को समर्पित है और यहां की प्राकृतिक सुंदरता भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।
नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की उपासना से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का प्रवेश होता है। भक्त अपने जीवन में देवी के आशीर्वाद से नए उत्साह और ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
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