रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण अब केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का व्यापक अभियान बन चुका है। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाते हुए कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार और समाज में उनकी निर्णायक भूमिका को मजबूत करना है।
# महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल
महिला सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। योजना के तहत प्रदेश की 66 लाख से अधिक पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक 30 किस्तों के माध्यम से 19,444 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को दी जा चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
# बेटियों के भविष्य के लिए रानी दुर्गावती योजना
बेटियों के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना शुरू कर रही है। इसके तहत बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। योजना के लिए बजट में 15 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये और मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
# पोषण और आंगनबाड़ी सेवाओं पर बड़ा फोकस
महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को मजबूत करने के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये और कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
# महतारी सदन से महिलाओं को प्रशिक्षण और आजीविका
महिलाओं के लिए सुरक्षित और उपयोगी सामुदायिक स्थान विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूरा हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका के अवसर और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
# 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर
महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित हैं। संकटग्रस्त महिलाओं को यहां कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था भी संचालित है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है, जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू की है।
# स्वयं सहायता समूहों से बढ़ रही ग्रामीण महिलाओं की आय
महिलाओं को स्वरोजगार और बाजार से जोड़ने के लिए स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से **यूनिटी मॉल** का निर्माण कर रही है, जहां महिला समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
बिहान मिशन के तहत प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित हो चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। वहीं प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी के लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की हैं।
रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियां ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
# महिला श्रमिकों के लिए सहायता योजनाएं
महिला निर्माण श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए भी कई योजनाएं संचालित हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये और दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान दिया जा रहा है।
मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पात्र गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
# कन्या विवाह और महिला ऋण योजनाओं से बढ़ रहा आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है।
महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण दिया गया है। वहीं महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
# शिक्षा, उज्ज्वला और मासिक स्वच्छता पर भी जोर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से प्रदेश में 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
शुचिता योजना के तहत 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे किशोरियों को मासिक स्वच्छता संबंधी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
# छत्तीसगढ़ी उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान
महिला समूहों के उत्पाद अब स्थानीय बाजार से आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहे हैं। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड “वोकल फॉर लोकल” अभियान का उदाहरण बनकर उभरा है।
इसके अलावा सखी साड़ी और मिलेट कैफे जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
# योजनाओं से आगे बढ़कर सामाजिक बदलाव की ओर
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण अब आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है। सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार और सामाजिक सम्मान को एक साथ जोड़कर महिलाओं के लिए अवसरों का व्यापक तंत्र तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
महिला स्वयं सहायता समूहों से लेकर लखपति दीदी, महतारी वंदन योजना से लेकर महतारी सदन और सखी वन-स्टॉप सेंटर तक, सरकार की विभिन्न पहलें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का फोकस महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक गतिविधियों, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व से जोड़ने पर है। महिला सशक्तिकरण की यह बदलती तस्वीर छत्तीसगढ़ में “सुशासन से समृद्धि” की दिशा में आगे बढ़ते विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है।










