धरसीवा। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, रचनात्मकता और उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यों के लिए सांकरा की शिक्षिका चंचल शुक्ला को उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए गतिविधि, प्रयोग, अनुभव और नवाचार से जोड़ने के उनके निरंतर प्रयासों को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। उनकी उपलब्धि को क्षेत्र में “गांव की गौरव” के रूप में भी सराहा जा रहा है।

शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में चंचल शुक्ला का चयन उनके नवाचारी शिक्षण कार्य, विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के प्रयास और शिक्षा को आनंददायी एवं अनुभवात्मक बनाने में सक्रिय भूमिका के लिए किया गया।
चंचल शुक्ला ने अपने दो दशक लंबे शिक्षकीय कार्यकाल में यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि प्रभावी शिक्षा केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थियों की जिज्ञासा को समझना, उन्हें सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना और स्वयं प्रयोग करके सीखने के अवसर उपलब्ध कराना भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विज्ञान शिक्षण को रोचक और सरल बनाने के लिए उन्होंने स्थानीय संसाधनों, सरल प्रयोगों, मॉडल निर्माण, विभिन्न गतिविधियों और तकनीकी साधनों का उपयोग किया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया। कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़कर समझाने से विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि विकसित करने पर विशेष जोर रहा।
उनके शिक्षण की प्रमुख विशेषता “करके सीखना” और “अनुभव से सीखना” है। इस पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों में विषयगत ज्ञान के साथ-साथ जिज्ञासा, तर्कशीलता, समस्या समाधान की क्षमता और वैज्ञानिक सोच विकसित करने का प्रयास किया जाता है।
शिक्षा के बदलते स्वरूप के अनुरूप चंचल शुक्ला ने ICT, गतिविधि आधारित शिक्षण, प्रयोगात्मक कार्य, कला के साथ विज्ञान का समेकन और स्थानीय परिवेश आधारित शिक्षण जैसी पद्धतियों को भी अपने शैक्षणिक कार्यों में शामिल किया है। उनका प्रयास रहता है कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी क्षमता और रुचि के अनुरूप सीखने का अवसर प्राप्त करे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप उनके शिक्षण कार्यों में समग्र विकास, अनुभवात्मक अधिगम, कौशल विकास, रचनात्मकता और सहयोगात्मक अधिगम जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाता है। उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है।
चंचल शुक्ला विद्यालय और शैक्षणिक समुदाय में अपने अनुभव साझा करने के लिए भी सक्रिय रहती हैं। शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गतिविधियों और व्यावसायिक अधिगम के अवसरों में सहभागिता करते हुए वे अन्य शिक्षकों के साथ नवाचारी गतिविधियों और प्रभावी शिक्षण-अधिगम रणनीतियों को साझा करती हैं।
उनका मानना है कि एक शिक्षक को स्वयं भी निरंतर सीखते रहना चाहिए। उनके अनुसार, “एक उत्कृष्ट शिक्षक की पहचान केवल उसके द्वारा पढ़ाए गए पाठ से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि उसके शिक्षण से विद्यार्थियों में कितनी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सीखने की इच्छा पैदा हुई।”
उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान मिलना न केवल चंचल शुक्ला की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि सांकरा और धरसीवा क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है। उनके सम्मान से क्षेत्र के अन्य शिक्षकों को भी शिक्षा में नए प्रयोग करने, विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर शिक्षण करने और विद्यालय को नवाचार का केंद्र बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
ग्राम सांकरा के प्राचार्य और समस्त शिक्षकगण, सरपंच रघुनाथ साहू, उपसरपंच योगेश साहू, पंचगण तथा एसएमसी अध्यक्ष ने चंचल शुक्ला को सम्मान मिलने पर बधाई दी। सभी ने उनके 20 वर्षों के समर्पित शैक्षणिक कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
शिक्षक दिवस पर मिला यह सम्मान चंचल शुक्ला के समर्पण, नवाचार और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि जब शिक्षक अपनी भूमिका को केवल पढ़ाने तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को प्रेरित करने, उनकी जिज्ञासा को दिशा देने और नई राह दिखाने के रूप में निभाता है, तब शिक्षा समाज में वास्तविक बदलाव का माध्यम बनती है।
सांकरा की शिक्षिका चंचल शुक्ला को मिला उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान शिक्षा में नवाचार और समर्पण की प्रेरक मिसाल है। उनकी 20 वर्षों की शिक्षकीय यात्रा यह दर्शाती है कि समर्पित शिक्षक न केवल विद्यार्थियों का भविष्य संवारता है, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए गौरव का कारण भी बनता है।










