गम की घटायें बन गयी हों अगर,
तो रोकना मत,उन्हें सही समय में बरसा देना
बंजर पड़े दिल में हौले से नमी जब पहुँचने लगे,
तो काँटों को छोड़,सौंधी खुशबू लिये सभी को महकाना..
ख्वाहिशें जो पाल कर रखीं हों अंतर्मन में अरसों से,
उन्हें पूरी करने के लिये ऊंची उड़ान भी भरना..
कभी गिर जाओ और चोट लग जाये तो कोई बात नहीं,
भर जायेंगे वे घाव एकदिन,बस! ज़िंदगी की डोर अपने मां-बाप से बाँधे जरुर रखना..









