डिजिटल युग में जहां हमें कई तरह की सहूलियत मिलती है तो इसका बुरा प्रभाव भी पड़ता है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि माता-पिता द्वारा खाली समय में डिजिटल मीडिया पर व्यस्त रहने से बच्चों के पालन पोषण पर बुरा असर पड़ने की संभावना अधिक रहती है।
अध्ययन के निष्कर्ष ‘कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर” जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
कनाडा के वाटरलू विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुए नए अध्ययन का उद्देश्य कोराना महामारी की शुरुआत में देखभाल करने वालों के डिजिटल मीडिया के उपयोग, मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों के पालन-पोषण के बीच संबंधों की जांच करना था। अध्ययन में पाया गया कि औसतन देखभाल करने वालों ने दिन में तीन से चार घंटे डिजिटल मीडिया पर बिताए।
अध्ययन के प्रमुख लेखक व वाटरलू विवि में क्लिीनिकल साइकोलाजी के विद्यार्थी जैस्मीन झांग ने बताया कि अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं ने 549 प्रतिभागियों का सर्वेक्षण किया। ये पांच से 18 वर्ष की उम्र के बीच कम से कम दो बच्चों के माता-पिता थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि देखभाल करने वाले ऐसे लोग जो समय बिताने के लिए इस दौरान ज्यादा डिजिटल गतिविधियों में व्यस्त थे, उन पर नकारात्मक प्रभाव ज्यादा पड़ा। वे बच्चों पर बेवजह झल्लाते पाए गए, इससे बच्चों के पालन पोषण पर बुरा प्रभाव पड़ा। इसलिए डिजिटल मीडिया का प्रयोग संभल कर करने की जरूरत है।










