हर भारतीय के लिए सोना को निवेश के रूप में सबसे पसंदीदा वस्तु मानता है। लोगों में सालों से इस पर भरोसा है, क्योंकि आर्थिक मुसीबत में सोना हमेशा काम आती है। यही कारण है कि जबसे दुनिया में कोरोना महामारी आई है, तब से सोने की कीमतें रोलर कोस्टर की सवारी पर हैं, जबकि निवेश विशेषज्ञ और फंड मैनेजर गोल्ड ज्वेलरी से ज्यादा पेपर गोल्ड की वकालत करते हैं।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के विपरीत, बाजार की गति के अनुसार सोने का मूल्य बढ़ता रहता है, यह आपको कोई ब्याज नहीं देता है। रिर्जव के SGBs को सोने का सबसे पसंदीदा पेपर गोल्ड के रूप माना जाता हैा सोना मूल्य वृद्धि के साथ ब्याज भी देता है। अगर आप अपने सोने के गहनों को बैंक में स्टोर करना पसंद करते हैं तो आपको लॉकर शुल्क का भुगतान करना होगा। एक तरीका है जिससे आप अपने घर पर रखी गोल्ड ज्वैलरी से अधिक कमा सकते हैं।
आप बेकार पड़े सोने को रिर्जव बैंक द्वारा निर्दिष्ट बैंक में जमा कर सकते हैं और उस पर ब्याज पा कर सकते हैं। यह सुविधा आरबीआई की स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत उपलब्ध है। यह बैंक की फिस्क्ड डिपाॅजिट की तरह ही होता है, जहां आप अपना बेकार सोना बैंक के पास जमा करते हैं और मैच्योरिटी पर, आपको सोने या सोने का मूल्य (आपकी पूंजी) पर अर्जित ब्याज के साथ वापस मिल जाता है।
हाल ही में एचडीएफसी बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बैंक ट्विटर पर RBI की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का प्रचार करते नजर आए। एचडीएफसी बैंक ने लिखा अपने ट्विटर पर लिखा “आप बेकार पड़े सोने के आभूषणों पर ब्याज कमा सकते हैं। एचडीएफसी बैंक आपके निष्क्रिय सोने पर उच्च ब्याज अर्जित करता है। एचडीएफसी बैंक गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में निवेश करें, लॉन्ग टर्म डिपॉजिट पर 2.50% और मीडियम टर्म डिपॉजिट पर 2.25% कमाएं। बता दें कि इस योजना के तहत, सोने की कीमत मैच्योरिटी के समय वर्तमान कीमत पर आधारित होगी। ब्याज की गणना सोने के जमा मूल्य पर की जाएगी।
एक निवेशक कम से कम 10 ग्राम कच्चा सोना जमा कर सकता है। निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। निवेशक 1 से 15 साल के बीच कोई भी टर्म चुन सकते हैं।
– शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD): कार्यकाल 1 से 3 वर्ष
– मध्यम अवधि की सरकारी जमा (MTGD): कार्यकाल: 5-7 वर्ष
– लंबी अवधि की सरकारी जमा (LTGD) अवधि 12-15 वर्ष
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