व्यक्ति को सदैव बुराई से बच कर रहना चाहिए , अगर कोई बुरा कर्म करता है तो वह कर्म उसको अपने जीवन में भोगना ही पड़ता है। जिस प्रकार बछिया झुंड में भी अपने मां को ढूंढ लेती है। वैसे ही कर्म का फल आपको हजारों के भीड़ में भी ढूंढ लेगा।
ईश्वर जगत के स्वामी हैं , वह कण-कण में निवास करते हैं। छोटे से छोटे जीव के हृदय में ईश्वर का वास होता है। उस जीव को कष्ट का अनुभव होना ईश्वर को कष्ट का अनुभव कराता है। अर्थात किसी जीव को कष्ट देकर अपने ईश्वर को खुश कैसे देख सकते हैं।










